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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 नवंबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर में नशे की बढ़ती समस्या पर दर्ज की गई स्वप्रेरित जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से पिछले एक साल में की गई कार्रवाई यह दर्शाती है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और वर्तमान में ऐसे घटनाओं की कोई ताजा शिकायत नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की खंडपीठ ने एक समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में बिलासपुर की जुनी लाइन बस्ती को नशेड़ियों की डिस्पेंसरी बता दिया गया था, जहाँ लोग खुलेआम नशे के इंजेक्शन ले रहे थे और अवैध सप्लाई से स्थानीय लोग दहशत में थे। यह स्थिति देखते हुए कोर्ट ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
26 नवंबर 2025 के आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि प्रशासन द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों और रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आ रही और पर्याप्त कदम उठाए गए हैं। इस आधार पर कोर्ट ने पीआईएल समाप्त कर दी।
मालूम हो कि हाई कोर्ट के निर्देश पर बिलासपुर के एसएसपी ने व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल किया था। इसमें 1 सितंबर 2024 से 15 अगस्त 2025 के बीच की कार्रवाई का ब्यौरा दिया गया।
इस अवधि में 67 मामले NDPS एक्ट में दर्ज किए गए तथा शहर के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए। पुलिस ने ड्रग नेटवर्क में शामिल आरोपियों की आर्थिक जांच भी की।
5 मामलों में 15 आरोपियों की लगभग 6 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज भी की गई।
इसी तरह 23 जुलाई 2025 को जिला प्रशासन ने अदालत की निगरानी में बड़ी मात्रा में जब्त माल नष्ट किया। प्रशासन द्वारा की गई विस्तृत कार्रवाई से संतुष्ट होकर हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं।


