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...तो बूढ़ातालाब-दुकानों का निर्माण क्यों हो रहा-ढेबर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर,22 नवंबर। साइंस कालेज चौपाटी हटाने पर जुबानी जंग चल रही है। पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने चौपाटी निर्माण को अवैध ठहराया है, और कहा कि चौपाटी किसी एजेंसी को दे दिया गया। इस पूरे मामले पर पूर्व मेयर ऐजाज ढेबर ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि हां, चौपाटी संचालन के लिए एजेंसी को ठेका दिया गया था, लेकिन सब कुछ नियमानुसार हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि साइंस कालेज चौपाटी अवैध है,तो बूढ़ातालाब चौपाटी का निर्माण क्यों किया रहा है?
ढेबर ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि यूथ हब के निर्माण का प्रस्ताव था। लाइब्रेरी और अन्य निर्माण की योजना रही है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए चौपाटी का निर्माण किया गया।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी से टेंडर हुआ। चौपाटी के आठ एजेंसियों ने प्रस्ताव दिए थे। इनमें बेहतर ऑफर पर काम दिया गया, और यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही है। ढेबर ने कहा कि प्रति दूकान नगर निगम को 22 हजार रूपए महीने राजस्व मिलता है। ढेबर ने इस बात को भी गलत ठहराया कि प्रभावशाली लोगों को चौपाटी में दुकानें दी गई है। यह मामला पहले भी उठा था, और प्रकरण कोर्ट में भी गया था। कहीं से कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई।
पूर्व मेयर ने कहा कि शैक्षणिक परिसर के पास चौपाटी निर्माण को गलत ठहराया जा रहा है, तो बूढ़ातालाब चौपाटी का निर्माण क्यों हो रहा है? उन्होंने कहा कि चौपाटी को हटाकर दुकानदारों को आमानाका ओवर ब्रिज के नीचे शिफ्ट करने की तैयारी है, लेकिन यह जमीन रेलवे की है, और रेलवे ने दुकान के लिए जमीन देने का विरोध किया है। पूर्व मेयर ने आरोप लगाया कि यह एक व्यक्ति (पूर्व मंत्री राजेश मूणत) की हठधर्मिता है, और उन्हीं के कारण सारा विवाद हो रहा है।


