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उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाए जाने के बाद से जारी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी है.
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष कुशवाहा ने एक्स पर एक लंबे पोस्ट में लिखा कि कल से पार्टी के निर्णय को लेकर पक्ष और विपक्ष में आ रही प्रतिक्रियाएं उत्साहवर्द्धक भी हैं और आलोचनात्मक भी हैं.
उन्होंने लिखा, "मेरे ऊपर परिवारवाद का आरोप लगाया गया है. मेरा पक्ष है कि अगर आपने हमारे निर्णय को परिवारवाद की श्रेणी में रखा है, तो ज़रा समझिए मेरी विवशता को. पार्टी के अस्तित्व व भविष्य को बचाने व बनाए रखने के लिए मेरा यह कदम ज़रूरी ही नहीं अपरिहार्य था. मैं तमाम कारणों का सार्वजनिक विश्लेषण नहीं कर सकता."
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश नीतीश कुमार की सरकार में एक चौंकाने वाला नाम थे क्योंकि उन्होंने न तो विधानसभा चुनाव लड़ा और न ही वह विधान परिषद के सदस्य ही हैं.
उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा, "पूर्व में पार्टी के विलय जैसा अलोकप्रिय और एक तरह से लगभग आत्मघाती निर्णय भी लेना पड़ा था. जिसकी तीख़ी आलोचना बिहार भर में हुई. उस वक्त भी बड़े संघर्ष के बाद आप सभी के आशीर्वाद से पार्टी ने सांसद, विधायक सब बनाए. लोग जीते और निकल लिए. झोली खाली की खाली रही. शून्य पर पहुंच गए. पुनः ऐसी स्थिति न आए, सोचना ज़रूरी था."
उन्होंने बेटे को मंत्री बनाए जाने के बचाव में लिखा, "दीपक प्रकाश, विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है. मेहनत से पढ़ाई कर के कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है उसने. इंतज़ार कीजिए, थोड़ा वक्त दीजिए उसे. अपने को साबित करने का. कर के दिखाएगा. अवश्य दिखाएगा."
उन्होंने आख़िर में लिखा, "वैसे भी किसी भी व्यक्ति की पात्रता का मूल्यांकन उसकी जाति या उसके परिवार से नहीं, उसकी काबिलियत और योग्यता से होना चाहिए."(bbc.com/hindi)


