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बिलासपुर डिवीजन में 42 में से केवल 30 पायलट ही उत्तीर्ण
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 12 नवंबर। 4 नवंबर को लाल खदान के पास हुए मेमू ट्रेन हादसे के बाद अब रेलवे विभाग में बड़ी लापरवाही सामने आ गई है। जांच में पता चला है कि कई लोको पायलट बिना साइकोलॉजिकल (एप्टीट्यूड सुटेबिलिटी) टेस्ट पास किए मेमू ट्रेन चला रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, बिलासपुर डिवीजन के 42 लोको पायलटों में से केवल 30 ने साइकोलॉजिकल टेस्ट पास किया है, जबकि 12 पायलट अभी तक टेस्ट से नहीं गुजरे हैं। वहीं नागपुर डिवीजन में 56 में से सिर्फ 33 लोको पायलट योग्य पाए गए, जबकि 23 पायलटों को अब टेस्ट देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने बिलासपुर, रायपुर और नागपुर डिवीजनों के मंडल रेल प्रबंधकों को अब जाकर निर्देश जारी किया है कि बिना एप्टीट्यूड टेस्ट पास किए कोई भी लोको पायलट मेमू ट्रेन न चलाए।
जांच में सामने आया है कि हादसे में मारे गए लोको पायलट विद्यासागर ने भी साइकोलॉजिकल टेस्ट पास नहीं किया था। जून माह में उसका एग्जाम लिया गया था, जिसमें वह फेल हो गया था।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अब सभी लोको पायलटों की मानसिक योग्यता, निर्णय क्षमता और प्रतिक्रिया समय की जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी।
याद रहे कि 4 नवंबर को गेवरा से बिलासपुर आ रही मेमू ट्रेन लाल खदान के पास खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी। इस हादसे में 11 यात्रियों की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि बाद में इलाज के दौरान 2 और लोगों की मौत हुई, जिससे मृतकों की संख्या 13 पहुंच गई।
रेलवे ने नए लोको पायलटों के लिए “लर्निंग ट्रेनिंग” को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी स्थिति में सिग्नल या सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो सके।


