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छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 8 नवंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकारी विभागों की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से एक सेवानिवृत्त महिला कर्मचारी के खिलाफ देरी से दायर की गई अपील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि सरकारी कामकाज में ईमानदारी, तत्परता और जिम्मेदारी जरूरी है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि विभागों में फाइलें महीनों और वर्षों तक पड़ी रहती हैं, यह प्रशासनिक लापरवाही का सीधा उदाहरण है। अदालत ने यह टिप्पणी तब की जब विभाग ने सिंगल बेंच के आदेश के 107 दिन बाद अपील दायर की। विभाग ने अपनी दलील में कहा कि फाइल प्रक्रिया, आदेश जारी होने में देरी और औपचारिकताओं की वजह से अपील समय पर नहीं हो सकी। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि “सरकार एक विशाल संगठन है, इसलिए कुछ देरी स्वाभाविक है।
लेकिन इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब यह साधारण स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकारी संस्थाओं को समझना होगा कि उनके कर्तव्य जनता के प्रति हैं, इसलिए कार्यों में देरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि देरी की माफी कोई अधिकार नहीं बल्कि अपवाद है, और इसका उपयोग सरकारी विभाग अपनी गलती ढकने के लिए नहीं कर सकते।


