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बिलासा एयरपोर्ट के स्वामित्व पर एएआई का दावा उड्ययन मंत्री और लोगों को गुमराह करने वाला
29-May-2022 10:47 AM
बिलासा एयरपोर्ट के स्वामित्व पर एएआई का दावा उड्ययन मंत्री और लोगों को गुमराह करने वाला

हवाई सेवा जनसंघर्ष समिति ने तथ्य सामने लाकर बताया, यह 66 साल से राज्य सरकार की संपत्ति

बिलासपुर, 29 मई। बिलासा एयरपोर्ट चकरभाठा विगत 66 सालों से राज्य सरकार की संपत्ति है, पर एयरपोर्ट एथॉरिटी ऑफ इंडिया बिलासपुर तहसीलदार के एक रद्द हुए आदेश को दिखाकर इस पर अपना दावा ठोक रही है। वह यहां की पूरी 365 एकड़ भूमि को हस्तांतरित करने की मांग कर रही है।

हवाई सुविधा जनसंघर्ष समिति ने कहा है कि केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने बिलासा एयरपोर्ट की 385 एकड़ भूमि को एएआई की संपत्ति बताते हुए उसे राज्य सरकार से हस्तांतरित करने कहा है। समिति ने तथ्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि जमीन पूरी तरह से राज्य सरकार की संपत्ति है। सभी दस्तावेज इस संबंध में मौजूद हैं।

बिलासपुर में एयरपोर्ट का निर्माण रॉयल ब्रिटिश आर्मी ने सन् 1942 में किया था। आजादी के बाद यह केंद्र सरकार को व्यवस्थापन के लिए हस्तांतरित हो गया। पर, केंद्र ने इसे आर्मी या एयरफोर्स का केंद्र नहीं बनाया। 1966 में एयरपोर्ट की यह भूमि विधिवत राज्य सरकार को आवंटित कर दी गई। तब से यह अविवादित रूप से राज्य सरकार की संपत्ति है। 1966 के पहले से ही खसरे में यह जमीन एयरोड्रम के नाम पर दर्ज है। 385 एकड में से 58 एकड़ में डीजीसीए लिखा है, पर यह खसरा नंबर एयरपोर्ट के बाहर की जमीन का है।

वर्ष 2011 में सेना जब इस एयरपोर्ट का अधिग्रहण करना चाहती थी, तो उसने एएआई को सर्वे के लिए बुलाया। तब डीजीसीए के उत्तराधिकारी होने के नाते एएआई ने तहसीलदार के समक्ष एयरपोर्ट की 385 एकड़ भूमि को अपने नाम करने के लिए आवेदन लगाया। तब के तहसीलदार ने बिना पुराने रिकॉर्ड और मिसल बंदोबस्त की छानबीन किए ही आवेदन को स्वीकार कर पूरी जमीन एएआई के नाम पर दर्ज करने का आदेश दे दिया।

जब यह बात कलेक्टर और अन्य उच्चाधिकारियों की जानकारी में आई तो एसडीएम के समक्ष तहसीलदार के आदेश के विरुद्ध एक अपील शासन की ओर से प्रस्तुत की गई। एसडीएम ने तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर दिया और पूरी जमीन पूर्ववत राज्य सरकार के नाम पर करने का आदेश दिया। एएआई ने इस सुनवाई में भाग लिया परंतु इस आदेश के विरुद्ध उसने कोई अपील आगे प्रस्तुत नहीं की।

हवाई सेवा जनसंघर्ष समिति ने कहा है कि उपरोक्त तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद एएआई सन् 2011 के तहसीलदार के निरस्त आदेश का हवाला देकर नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व अन्य संबंधितों को गुमराह कर रहा है।   


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