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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 20 मई। हाईकोर्ट ने एक निलंबित आरक्षक के मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि किसी शासकीय कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरण एक साथ नहीं चलाया जा सकता।
जांजगीर-चांपा जिले के आरक्षक नारद ताम्रकार के खिलाफ जांजगीर पुलिस ने आईपीसी की धारा 506, 509 बी और आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया। इसके बाद उसे सेवा से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद जांजगीर एसपी ने उसके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने का आदेश निकाला। इस कार्रवाई को आरक्षक ने चुनौती देते हुए अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। कोर्ट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का दृष्टांत देते हुए बताया कि किसी के विरुद्ध आपराधिक जांच की तथा विभागीय जांच की कार्रवाई ऐसे मामलों में नहीं की जा सकती जिनमें अभियोजन पक्ष और गवाह समान हो। ऐसे मामलों में पहले अभियोजन और गवाह को आपराधिक मामलों की जांच में शामिल होना होगा, अन्यथा जांच की पूरी कार्रवाई दूषित हो जाएगी।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद विभागीय जांच पर स्थगन दे दिया और इस संबंध में जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक को निर्देश जारी किया है।


