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परसा कोल खदान के विरोध में आदिवासियों का पटरी जाम
20-May-2022 3:42 PM
परसा कोल खदान के विरोध में आदिवासियों का पटरी जाम

  अंबिकापुर-बिलासपुर एनएच बंद, मुख्य मार्ग को किया डायवर्ट  
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
अंबिकापुर / उदयपुर, 20 मई।
शुक्रवार को परसा कोल खदान के विरोध में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज द्वारा अनिश्चितकालीन रेल रोको आंदोलन के तहत अंबिकापुर-बिलासपुर मार्ग स्थित साल्ही रेल पुल के नीचे पटरी को जाम कर दिया।

पटरी जाम करने के अलावा लोगों ने अंबिकापुर-बिलासपुर मार्ग नेशनल हाईवे को भी जाम कर दिया, जिसके कारण उक्त हाईवे बंद हो गया है। लोगों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने लगभग 500 की संख्या में पुलिस बल तैनात किया है। नेशनल हाईवे में जाम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने बिलासपुर की ओर से व अंबिकापुर की ओर से आने वाले वाहनों के मार्ग को डायवर्ट कर दिया है।

आंदोलन की पूर्व सूचना पर राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम कंपनी ने कोयला ढुलाई में लगे मालगाडिय़ों को बंद कर दिया है। सर्व आदिवासी समाज व स्थानीय लोगों द्वारा अनिश्चितकालीन रेल रोको आंदोलन अगर जारी रहा तो कोयला ढुलाई प्रभावित हो जाएगा और राजस्थान के पॉवर कंपनियों में कोयला का संकट गहरा सकता है।

इस आंदोलन में स्थानीय लोगों के साथ छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सोहन पोटाई के अलावा छत्तीसगढिय़ा क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल तथा अन्य संगठनों के लोग भी मौके पर मौजूद हैं।

सरगुजा के अम्बिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर साल्ही मोड़ रेल पुल के पास छ.ग. सर्व आदिवासी समाज के प्रांतीय आह्वान पर हसदेव अरण्य क्षेत्र परसा कोल ब्लॉक एवं परसा ईस्ट केते वासेन में कोयला खनन व पेड़ों की कटाई पर तत्काल बंद कराने हेतु अनिश्चितकालीन मालवाहक वाहन व टे्रनों को रोके जाने चक्काजाम किया गया है।

आंदोलन कर रहे लोगों ने बताया कि हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक एवं परसा ईस्ट केते बासेन कोयला खनन की अनुमति से लगभग 4 गांव पूर्णतया उजड़ जाएगा और लगभग 4.5 लाख पेड़ कटने की आशंका है, जिसका विरोध स्थानिय मूलवासी व आदिवासी समाज लंबे समय से करते आ रहे हैं और अक्टूबर 2021 को 300 किमी पैदल मार्च कर छग प्रदेश के राजधानी रायपुर पहुंचकर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से भेंट कर खनन व पेड़ काटने पर तत्काल रोक लगाने की मांग कर चुके हैं। आज की स्थिति में कोल ब्लॉक का प्रदेश, देश व विदेशों में भी विरोध किया जा रहा है।

सरगुजा पूर्णत: पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र जिला है, यहां आदिवासी, मूलवासी समाज निवासरत हैं और प्राकृतिक आधारित अपना जीवन यापन करते हुए अपनी टोटम प्रणाली, पेन देवी देवता जो आदिवासी पूर्वज हैं, को गांव की भूमि के विशिष्ट स्थानों में स्थापित है। कोल खनन एवं पेड़ कटाई से आदिवासी समाज अन्यत्र विस्थापित होने से उनकी आस्था का विनाश हो जाएगा। वन अधिकार कानून मान्यता 2006 का भी पूर्ण उल्लंघन करते हुये कोल खनन एवं पेड़ कटाई करने की अनुमति सरकार द्वारा दिया गया है।

 प्रभावित क्षेत्र हसदेव अरण्य इको सेंसिटिव जोन है। भारतीय जीव संस्थान ने हसदेव अरण्य को समृद्ध, जैव विविधता से परिपूर्ण वन क्षेत्र माना है, जिसमें कई विलुप्त प्राय वन प्राणी आज भी मौजूद है। हसदेव अरण्य संरक्षित क्षेत्र में खनन होने से मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना सहित कई जिलों के सिंचाई प्रभावित होगी। हाथी मानव द्वंद अनियंत्रित हो जाएगा।

गौरतलब है कि सरगुजा जिला के उदयपुर विकास खण्ड में प्रस्तावित परसा कोयला खदान को मंजूरी मिली है। यहां राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम कंपनी 841.538 हेक्टेयर वन भूमि पर कोयले की खुदाई करेगी। परसा कोल खदान परियोजना से कंपनी पांच लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष कोयला उत्खनन करेगी। इस परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।


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