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हेलीकॉप्टर हादसे की जांच के लिए पहुंची डीजीसीए की टीम
13-May-2022 3:51 PM
हेलीकॉप्टर हादसे की जांच के लिए पहुंची डीजीसीए की टीम

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 13 मई।
हेलीकॉप्टर क्रैश होने की घटना की जांच के लिए डीजीसीए की टीम शुक्रवार को यहां पहुंची। डीजीसीए की टीम तकनीकी विश्लेषण के लिए पोस्टमार्टम सेंटर में मौजूद रही। डीजीसीए के अफसरों ने दोनों शवों की जांच के बाद ब्लैक बॉक्स में छिपी हादसे की मुख्य वजह ढूंढने तथ्य जुटाए।

सुरक्षा से जुड़े अफसरों ने बताया, डीजीसीए के जांच में ही पता चल सकेगा कि हैलीकाप्टर के कैश होने के पीछे आखिर कारण क्या था। बताया गया कि इस हैलीकाप्टर में ऑटो पायलट, बेहतर लैंडिंग सिस्टम, नेविगेशन, मौसम रडार सिस्टम, जैसी सुविधाएं थीं लेकिन इसके बाद भी अचानक से हादसा हो गया।

पोस्टमार्टम सेंटर में मौजूद एक्सपर्ट्स ने बताया कि अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी इस चॉपर को एक बेहतर हैलीकाप्टर बताती रही है। शहरी क्षेत्रों में और कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों में फ्लाइंग के लिए इसे तैयार किया गया । लगभग 310 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पर उडऩे वाले चापर की मदद छत्तीसगढ़ में फोर्स भी लेती रही है। 10,000 फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाली इस चापर की सेवाएं छत्तीसगढ़ पुलिस के नक्सल ऑपरेशन के लिए भी करती रही है।

पोस्टमार्टम के वक्त मौजूद आईजी रायपुर रेंज ओपी पाल ने को पायलट पांडा के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई बार ऐसे मौके आए थे जब चापर का इस्तेमाल खुफिया मिशन के लिए भी किया गया। वे जरूर किसी ऑपरेशन में नहीं रहे लेकिन पायलट पांडा के साथ मिलने के बाद जरूर उन्हें भी खुफिया आपरेशन को लेकर अनुभव साझा करने मौका मिला। आईजी पाल बताते हैं पायलट पांडा काफी अनुभवी थे। उन्हें छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति के बारे में भी बेहतर जानकारी थी। जिसका लाभ फोर्स के ऑपरेशन में भी मिलता रहा। अचानक से एक हादसा होने के बाद उनकी मौत की खबर बेहद दुखद है। आईजी ने बताया, पायलट पांडा उनके बेहद करीबी मित्र थे।

ब्लैक बॉक्स की जांच के चर्चे

पोस्टमार्टम केंद्र के बाहर ब्लैक बॉक्स को लेकर लोग आपस में चर्चा करते रहे। हेलीकॉप्टर 109 पावर एलिट मॉडल का था जिसे छत्तीसगढ़ सरकार ने 2007 में खरीदा था। डॉ. रमन सिंह की सरकार में इस हेलीकाप्टर की खरीदी हुई थी। पोस्टमार्टम के वक्त पहुंचे पूर्व सीएम रमन सिंह ने कहा कि इस चापर में उन्होंने कई बार दौरे किए। पायलट पांडा उन्हें लेकर कई बार उड़ान भरा था। ब्लैक बॉक्स से अंतिम समय में हेलीकॉप्टर की तकनीकी खराबी और पायलटों की आपसी बातचीत भी सामने आ पाएगी।
2010 के बाद से लगातार राज्य के लिए सेवा

परिवार से जुड़े करीबियों ने बताया कि पायलट पांडा मूलतया ओडिशा राज्य के थे। एयरफोर्स से रिटायरमेंट के बाद 2010 से वे छत्तीसगढ़ के लिए सेवा दे रहे थे। लंबा वक्त राज्य में बीत जाने के बाद परिवार ने निर्णय लिया कि पायलट पांडा का अंतिम संस्कार रायपुर में ही किया जाएगा।

एसएसपी अग्रवाल ने रात में की थी पुष्टि
एयरपोर्ट में हादसे के बाद चॉपर में मौजूद दोनों पायलट और को पायलट की मौत की पुष्टि रात में एसएसपी प्रशांत अग्रवाल ने की थी। उनके बताए अनुसार, हादसा रात 9 बजकर 10 मिनट पर यह हुआ। कैप्टन गोपाल कृष्ण पांडा और कैप्टन अजय श्रीवास्तव रात में फ्लाइंग प्रैक्टिस कर रहे थे। चॉपर के क्रैश हो जाने के बाद दोनों की मौके पर मौत हो गई।
 


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