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शिकायत के बाद पड़ताल शुरू, कार्रवाई संभव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 2 मई। सरगुजा संभाग की आधा दर्जन से अधिक सिंचाई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। इन योजनाओं पर सौ करोड़ से अधिक की राशि खर्च हुई है, लेकिन पानी किसानों तक नहीं पहुंचा। खास बात यह है कि परियाजनाओं में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कार्यपालन यंत्री के खिलाफ तमाम शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि सिंचाई परियोजनाओं में गड़बड़ी की तमाम शिकायतों का परीक्षण हो रहा है। जल्द ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
बताया गया कि सरगुजा संभाग सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना खुटपाली व्यपर्वतन पहले ही चरण में दम तोड़ चुकी है। इस योजना के पहले चरण का कार्य पूरा होने के बाद 11 गांव की 3052 हेक्टेयर जमीन को सिंचित करने का प्रस्ताव था। इस योजना में अब तक एक अरब से अधिक खर्च हो चुके हैं, परंतु अभी तक एक हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई नहीं हो पाई है।
इसी तरह बलरामपुर जिले की गम्हरिया, और खरखरा सिंचाई योजना में गड़बड़ी सामने आई है। यह बात उभरकर सामने आई है कि योजना का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया था, और करीब 10 करोड़ की राशि आहरित कर ली गई है। इसकी शिकायत हुई है, और उच्च स्तरीय जांच समिति बिठाई गई है। इस पूरे मामले में कार्यपालन यंत्री यूएस राम पर उंगलियां उठी है, और वो जांच के घेरे में आ गए हैं।
बताया गया कि ईई राम के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें हुई है। मगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वे अभी भी रामानुजगंज ईई के पद पर काम कर रहे हैं। उनके खिलाफ ठेकेदार को फायदा पहुंचाने सहित कई और शिकायतें हैं। राम के खिलाफ बैंकुठपुर, और रामानुजगंज में पदस्थापना के दौरान दो बार एसीबी का छापा भी पड़ चुका है। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज है। बावजूद इसके अहम सिंचाई योजनाएं उनकी देखरेख में ही चल रही है।


