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साल 1901 के बाद से अब तक के मार्च महीनों में 2022 वाला मार्च तीसरा सबसे गर्म था.
अप्रैल में भी देश के अलग-अलग राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है. ऐसे में अब केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बढ़ते तापमान और लू को लेकर सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों के लिए एडवाइज़री जारी की है.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों को बताया है कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) हर रोज़ तापमान और लू को लेकर चेतावनी जारी कर रहे हैं और इसे सभी राज्यों के साथ साझा किया जा रहा है. इस चेतावनी में अगले 3-4 दिन के हीटवेव को लेकर पूर्वानुमान होते हैं. ऐसे में राज्य इन्हें ज़िले और स्वास्थ्य के स्तर पर प्रसारित कर सकते हैं और अपनी तैयारी कर सकते हैं.
भूषण ने राज्यों को "गर्मी से संबंधित बीमारियों पर राष्ट्रीय कार्य योजना" से संबंधित गाइडलाइंस को ज़िला स्तर पर प्रसारित करने के लिए कहा है.
उन्होंने एडवाइज़री में लिखा है, ''राज्यों को अपने सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को गर्मी से जुड़ी बीमारी की ज़ल्द पहचान के लिए तैयार करना चाहिए.'' उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त पीने के पानी को सुनिश्चित करने के लिए कहा है. साथ ही संवेदनशील जगहों पर कूलिंग अप्लायंस की उपलब्धता के बारे में भी कहा है.
एडवाइज़री में कहा गया है कि स्वास्थ्य केंद्रों तैयार रहे और ये सुनिश्चित करें कि पर्याप्त मात्रा में आईवी फ्लूड, आईस पैक और ओआरएस जैसी ज़रूरी चीजें हों.
हालांकि, भारतीय मौसम विभाग की तरफ़ से राहत भरा अनुमान ये जताया गया है कि सोमवार से गरज़ चमक के साथ धूल भरी आंधी चल सकती है. वेस्टर्न डिस्टरबेंस पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के पास है और दिल्ली की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में उत्तर-पश्चिम भारत में धूल भरी आंधी चलने का अनुमान है.
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 15 मई से मॉनसून शुरू हो जाएगा.
इससे पहले मौसम विभाग ने पांच दिनों के लिए पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के क्षेत्रों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया था.
भीषण गर्मी की वजह क्या है?
समय से पहले दस्तक दे चुकी भीषण गर्मी की प्रमुख वजह ये है कि इन दोनों महीनों में होने वाली थोड़ी-मोड़ी बारिश या बिजली गिरने और ओले गिरने के वाक़ये नदारद रहे हैं.
दूसरा, देश के पश्चिमी हिस्से से चलने वाले हवाएँ जब दक्षिणी और मध्य भारत की हवाओं से टकरातीं हैं तो मौसम ख़राब होता है यानी बारिश और तूफ़ान आते हैं. इस बार ये भी बहुत कम हुआ है.
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मार्च और अप्रैल में तेज़ गर्म हवाएं चलना असामान्य हैं और अगर कार्बन उत्सर्जन को वातावरण से घटाया नहीं गया तो जलवायु परिवर्तन के कारण ये हीटवेव मौसम चक्र का सामान्य हिस्सा बन सकती हैं. (bbc.com)


