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4 साल बाद बिना वैध कारण के जारी आयकर नोटिस को खारिज किया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने
12-Apr-2022 10:58 AM
4 साल बाद बिना वैध कारण के जारी आयकर नोटिस को खारिज किया छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने

'छत्तीसगढ' संवावददाता

बिलासपुर, 12 अप्रैल। हाईकोर्ट ने गए आयकर पुनर्मूल्यांकन की एक नोटिस को रद्द कर दिया है, जो बिना वैध कारण बताए 4 साल बाद जारी किया गया था।

यह मामला एक निजी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी एम एस मैन्युफैक्चरिंग एंड सेलिंग का है। याचिकाकर्ता कंपनी ने अमरनाथ अग्रवाल और उनकी पत्नी रमादेवी अग्रवाल के लिए सन् 2014-15 में 25 हजार शेयर जारी किए थे। प्रत्येक शेयर का मूल्य 100 रुपए था। याचिकाकर्ता ने अपने आयकर रिटर्न में इन शेयरों की बिक्री का खुलासा किया था। आयकर विभाग से धारा 142 (1) के तहत नोटिस मिलने के बाद याचिकाकर्ता ने आवश्यक विवरण प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने बताया कि स्टील उद्योग को हुए नुकसान और बाजार में कोई खरीदार नहीं होने के कारण कंपनी को धन की कमी का सामना करना पड़ा, इसलिए शेयरों को उनके अंकित मूल्य पर बेचना पड़ा।

आयकर विभाग ने नोटिस के जवाब पर विचार करने के बाद धारा 143 (3) के तहत अंतिम निर्धारण आदेश पारित किया और धारा 148 के तहत 4 साल की अवधि के बाद याचिकाकर्ता को नोटिस जारी की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने सभी लेनदेन, विशेष रूप से शेयरों की बिक्री का खुलासा कर दिया था। आयकर विभाग को अपने जवाब में उन्होंने यह भी बताया था कि इन शेयरों के हस्तांतरण की वजह क्या थी। ऐसी स्थिति में आयकर विभाग को उन्हें नोटिस जारी करने का कोई आधार नहीं बनता है। याचिकाकर्ता की ओर से रिटर्न जमा करने में कोई गलती नहीं की गई है। उसने सभी तथ्यों को पूरी तरह से सही मायने में प्रकट किया है। यह नोटिस इसलिए टिकाऊ नहीं है क्योंकि नोटिस जारी करने का कारण धारा 56 (2) 7 सी के प्रावधानों के तहत शेयरों का हस्तांतरण किया गया था। धारा 56 में अन्य स्रोतों से आय का उल्लेख किया जाता है। धारा 56 (7) में यह बताया जाता है कि कौन सी आमदनी हिंदू अविभाजित परिवार अथवा किसी व्यक्ति द्वारा किसी वित्तीय वर्ष में प्राप्त की गई है।

आयकर विभाग ने तर्क दिया कि धारा 148 के तहत दी गई नोटिस में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है। नोटिस में ही इसे जारी करने का कारण और आधार स्पष्ट रूप से बताया गया है।

जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा है कि धारा 148 के तहत नोटिस जारी करने के लिए ठोस आधार हो। इसमें आयकर अधिनियम की धारा 147 का अनिवार्य रूप से अनुपालन किया जाना चाहिए। रिटर्न जमा करने के 4 साल बीत जाने के बाद कंपनी के खिलाफ पुनर्मूल्यांकन की कार्रवाई शुरू की गई है। कार्रवाई शुरू करने के लिए आयकर विभाग के निर्धारण अधिकारी को अपना निष्कर्ष दर्ज करना चाहिए कि याचिकाकर्ता की खुलासा नहीं करने की कोई विफलता थी।‌  नोटिस जारी करने के कारणों को पढ़ने से ऐसा प्रकट नहीं होता है, इसलिये नोटिस रद्द की जाती है।


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