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राजस्थान की सरकार ने करौली में हुई घटना की जाँच के आदेश दिए हैं. सरकार के मुताबिक़ जाँच रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर सौंपी जाएगी. पिछले सप्ताह शनिवार को करौली में हिंदू नववर्ष के दौरान जुलूस पर पथराव के कारण हिंसा हुई थी, जिसमें कम से कम 35 लोग घायल हुए थे. पुलिस ने इस मामले में अभी तक 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.
इस बीच राजस्थान के पुलिस महानिदेश एमएल लाठर ने कहा है कि प्रशासन ने जुलूस की अनुमति तो दी थी, लेकिन डीजे चलाने की अनुमति नहीं दी गई थी. उन्होंने कहा- करौली में 2015 के बाद कभी इस तरह का जुलूस नहीं निकला था. शुरू से ही जुलूस की बॉडी लैंग्वेज अलग तरह की थी और जुलूस में चल रहे गाने आपत्तिजनक थे, जिसकी वजह से वहाँ उपस्थित अन्य लोगों ने पथराव किया. उन्होंने बताया कि इसके बाद घटी घटना बहुत दुखद रही, इसमें 10 मुकदमें दर्ज़ किए गए हैं और कुल 105 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
दूसरी ओर बीजेपी नेता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने राजस्थान सरकार पर तालिबानी सोच के साथ काम करने का आरोप लगाया है. समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में उन्होंने कहा- पुलिस को घटना की पहली से जानकारी क्यों नहीं थी? वहाँ 14-15 दुकानों को जलाया गया. मामले में अब तक किसी की गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुई है?
इस बीच करौली में लगाए गए कर्फ्यू में आज कुछ देर ढील देने के बाद बाज़ार में लोग ख़रीदारी करते हुए दिखे. गुरुवार को करौली नगर परिषद में कर्फ्यू 10 अप्रैल की सुबह 12 बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया था. कर्फ्यू में प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक ढील दी जा रही है, जिसके दौरान सब्जियाँ और फल स्टोर, जनरल स्टोर, डेयरी, ईंधन स्टेशन और गैस एजेंसियाँ काम कर रही हैं. एक युवक ने बताया, "तीन घंटे के लिए कर्फ्यू में ढील दी गई है. अब हम कुछ न कुछ ख़रीद सकते हैं. ज़रूरत के सामान की कमी के कारण बहुत परेशानी हो रही थी." (bbc.com)


