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दीपाली के विरोध में 12 और समर्थन में 3 मत
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 7 मार्च। भाजपा की छुईखदान नगर पंचायत अध्यक्ष दीपाली जैन को आखिरकार अविश्वास प्रस्ताव के चलते अपना पद गंवाना पड़ गया। सोमवार को हुई सामान्य सभा की बैठक में श्रीमती जैन के विरोध में 12 मत पड़े और 3 मत उनके पक्ष में मिले।
श्रीमती जैन को पद से हटाने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां नए अध्यक्ष को लेकर तेज हो गई है। हालांकि नए अध्यक्ष की ताजपोशी के लिए प्रशासन की ओर से तारीख का ऐलान नहीं किया गया है।
छुईखदान नगर पंचायत अध्यक्ष की सीट भाजपा के हाथ से फिसल गई। राजनीतिक रूप से भाजपा के लिए यह बड़ा झटका है। दीपाली जैन के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और भाजपा के पार्षद एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सियासी उठापटक कर रहे थे। आज छुईखदान नगर पंचायत में हुए मतदान में दीपाली जैन 12-3 से परास्त हो गई। भाजपा के बागी पार्षदों ने कांग्रेस का साथ देकर पार्टी को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है।
बताया जाता है कि दीपाली जैन के कामकाज को लेकर न सिर्फ कांग्रेस, बल्कि भाजपा पार्षद भी नाराज थे। उनके परिवार के नगर पंचायत के कामकाज में बढ़ते दखल से विरोध की आग तेज हो गई। छुईखदान भाजपा में गुटीय लड़ाई के चलते पार्टी को बड़ी क्षति पहुंची है। दीपाली जैन के पति और उनके रिश्तेदारों को नगर पंचायत के विकास कार्यों का काम देने का मामला ही विवाद का कारण रहा। कांग्रेस पार्षदों को अध्यक्ष के रवैये से नाराजगी थी।
15 पार्षदों वाले नगर पंचायत का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद से दीपाली जैन पर एकतरफा फैसला लेने और काम बांटने का आरोप लगता रहा है।
यह भी चर्चा है कि एक भाजपा नेता ने मिलकर दीपाली जैन को अपदस्थ करने के लिए नाराज पार्षदों को उकसाया था, वहीं कुछ भाजपा नेताओं ने बागियों के सैर-सपाटे से लेकर अविश्वास प्रस्ताव लाने की मुहिम को हवा दी। आखिरकार भाजपा को नगर पंचायत की कुर्सी गंवानी पड़ गई।
उधर अविश्वास प्रस्ताव में मात खाने के बाद भाजपा की सांगठनिक क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। तय समय पर भाजपा पार्षदों की नाराजगी को दूर करने से पूरा मामला शांत हो सकता था, लेकिन संगठन से जुड़े नेताओं ने इस मामले को हल्के में लिया।
एक भाजपा नेता संजय जैन और उनकी पत्नी अनुभा जैन को निष्कासित कर मामले में कड़ाई दिखाने की जरूर कोशिश हुई, लेकिन यह एक देर से उठाया गया कदम था।


