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आंखों के सामने गिरे मिसाइल से लगा कि कभी घर नहीं लौट पाउंगी...
06-Mar-2022 1:16 PM
आंखों के सामने गिरे मिसाइल से लगा कि कभी घर नहीं लौट पाउंगी...

 बमों की गूंज आज भी दे रही सुनाई  
यूक्रेन से लौटी मेडिकल छात्रा आयशा ने बताई आपबीती
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
राजनांदगांव, 6 मार्च।
जिले के मानपुर के खडग़ांव की रहने वाली आयशा जार्ज यूक्रेन-रूस की जंग में खुद को फंसे रहते देखकर एक वक्त मान बैठी थी कि वह कभी घर नहीं लौट पाएगी। यूक्रेन-रूस के बीच छिड़े युद्ध के नजारे और बमों की गूंज के बीच आयशा देश के दूसरे सहपाठियों के साथ शनिवार को सकुशल घर लौट आई।

आयशा पिछले दो सालों से यूक्रेन के दूसरे बड़े शहर खारकीव में चिकित्सकीय अध्ययन कर रही थी। इससे पहले युद्ध ने आयशा समेत सैकड़ों मेडिकल छात्रों को खारकीव छोडऩे के लिए मजबूर कर दिया। जैसे रूस ने यूक्रेन पर हमले शुरू किए, उसके कुछ घंटों के भीतर खारकीव शहर भी मिसाइलों के निशाने पर आ गया। किरायेदार आयशा भी दूसरे साथियों के साथ घर छोडऩे के लिए मजबूर हुई और सीधे नोवोकोवा मेट्रो के बंकर में शरण ली।

बंकर में रहते आयशा को दो दिन तक भूखे भी रहना पड़ा। बाद में सीजफायर में मिले कुछ घंटों के बीच खानपान का सामान खरीदने और बनाने के लिए जानजोखिम भी उठानी पड़ी।

'छत्तीसगढ़'  से युद्ध के दृश्य और वहां के हालात से जूझते स्वदेश वापसी के कड़वे अनुभव को साझा करते आयशा ने बताया कि युद्ध के गुजरते दिनों के बीच जब 500 मीटर दूरी पर एक मिसाइल गिरी, तब ऐसा लगा कि घर वापसी करना पहाड़ में चढऩे जैसा है। वह घर-परिवार को लेकर काफी नर्वस थी। हिम्मत जुटाते हुए किसी तरह खारकीव से निकलकर लवीव पहुंची। लवीव में 4 घंटे इंतजार करने के बाद एक टैक्सी से जैसे ही पोलैंड बार्डर के लिए ट्रेन पकडऩे स्टेशन पहुंची, उसी दौरान एक मिसाइल से पूरा इलाका दहल गया। लवीव शहर से पोलैंड सीमा के लिए निकली ट्रेन खारकीव-कीव से होकर गुजरी। उस दौरान ट्रेन की लाईट, इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई, ताकि रूसी सैनिकों को ट्रेन की रूट का पता न चले। जैसे ही लवीव शहर ट्रेन पहुंची, उसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। पोलैंड बार्डर में माईनस 3 डिग्री सेल्सियस में खड़े रहते हुए करीब 4 घंटे इंतजार के बाद दाखिला मिला।

आयशा के मुताबिक पोलैंड की सीमा पर भारतीय दूतावास के अफसरों ने बेहतर बंदोबस्त कर सभी के खानपान और आवास की व्यवस्था की थी।
आयशा का कहना है कि युद्ध में खारकीव जैसे शहर को तबाह कर दिया। उनका कहना है कि रूस और यूक्रेन को आपसी बातचीत से मसले का हल निकालना चाहिए। फिलहाल आयशा अपने माता-पिता के साथ बुरे दौर को भुलाने की कोशिश में है और ऑनलाइन पढ़ाई कर रही है।
 


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