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पति या पत्नी का शारीरिक संबंध के लिए इंकार करना क्रूरता-हाईकोर्ट
03-Mar-2022 1:08 PM
पति या पत्नी का शारीरिक संबंध के लिए इंकार करना क्रूरता-हाईकोर्ट

'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 3 मार्च।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विवाह भंग करने के लिए लगाई गई याचिका के एक मामले में कहा है कि स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए पति पत्नी के बीच शारीरिक संबंध का होना आवश्यक है। यदि दोनों में से कोई भी इसके लिए इंकार करता है तो वह क्रूरता की श्रेणी में आता है।

बिलासपुर के एक युवक ने बेमेतरा की युवती के साथ विवाह किया। विवाह के कुछ समय बाद वह अपने मायके में रहने लगी और वहीं नौकरी करने लगी। युवक जब भी अपनी पत्नी को लेने के लिए जाता था, वह आने से इंकार कर देती थी। वह अपने पति से बेमेतरा में ही आकर रहने के लिए कहती थी। जब वह ससुराल आती थी तब वह यह कह कर शारीरिक संबंध बनाने से मना करती थी कि वह मोटा है और सुंदर नहीं है।

युवक ने नवंबर 2017 में परिवार न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन लगाया जो खारिज हो गया। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट में जस्टिस पी सैम कोसी और जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट में विवाह भंग के लिए दायर युवक की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए पति पत्नी के बीच शारीरिक संबंध का होना आवश्यक है और ऐसा नहीं करना कू्ररता की श्रेणी में आता है। पति के प्रति पत्नी का व्यवहार  कू्ररतापूर्ण है।


 


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