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दस माह के इलाज के बाद भी नहीं सुधर पाया स्वास्थ्य
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 3 मार्च। 10 महीने पहले अचानकमार टाइगर रिजर्व में घायल अवस्था में मिली बाघिन रजनी को नहीं बचाया जा सका। बुधवार को कानन पेंडारी जू में उसकी मौत हो गई।
मालूम हो कि अचानकमार टाइगर रिजर्व के छपरवा रेंज में 8 जून 2021 को यह बाघिन घायल अवस्था में मिली थी। उसे इलाज के लिए कानन पेंडारी लाया गया था। उसका नाम रजनी रखा गया। वन विभाग अब तक यह पता नहीं कर सका है कि उसे घायल शिकारियों ने किया या जानवरों ने।
हालांकि यह बताया गया कि वह बांधवगढ़ अथवा कान्हा नेशनल पार्क से भटकते हुए अचानकमार अभ्यारण पहुंची थी।
कानन पेंडारी लाए जाने के बाद कई बार उसे वापस जंगल में छोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन गहरी चोट के कारण ऐसा नहीं किया जा सका।
बाघिन के कंधे पर घाव था, इसके अलावा पूंछ में भी चोट लगी थी। वह अपने पैरों पर भी खड़ी नहीं हो पा रही थी।
डीएफओ विष्णु नायर का कहना है कि उपचार के बावजूद उम्र दराज होने के कारण बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो पाया, जिसके कारण बुधवार 2 मार्च की दोपहर में उसका निधन हो गया। बाघिन औसत आयु 14 वर्ष होती है और यह करीब 13 वर्ष की थी, इसलिए उसकी मौत स्वाभाविक कारणों से होने का दावा वन विभाग के अधिकारी कर रहे हैं।
बाघिन का पोस्टमार्टम कराया गया और बिसरा को सुरक्षित कर जांच के लिए लैब भेजा गया है। कानन पेंडारी जू में ही उसका शव जलाया गया।


