कोण्डागांव

तीलियाबेड़ा बेदखली मामला गरमाया, भीम आर्मी ने जांच और मुआवजे की मांग पर सौंपा ज्ञापन
13-Jun-2026 10:06 PM
तीलियाबेड़ा बेदखली मामला गरमाया, भीम आर्मी ने जांच और मुआवजे की मांग पर सौंपा ज्ञापन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोण्डागांव, 13 जून। मालगांव के आश्रित ग्राम तीलिया बेड़ा में हाल ही में हुई वन भूमि बेदखली कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को भीम आर्मी भारत एकता मिशन के नेतृत्व में प्रभावित आदिवासी परिवारों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच, पुनर्वास, मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। संगठन ने प्रशासन को सात दिनों के भीतर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम भी दिया है।

गौरतलब है कि 10 जून को वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मालगांव के साल वन क्षेत्र में आरक्षित वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की थी। विभाग के अनुसार लगभग 35 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती एवं अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। नोटिस जारी करने और निर्धारित समय देने के बाद जेसीबी की सहायता से अतिक्रमण हटाया गया था। अधिकारियों ने बताया था कि प्रभावित क्षेत्र में कई मकान भी बने हुए थे।

अब इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों की ओर से आरोप लगाया गया है कि उनके मकानों को बिना ग्राम पंचायत प्रस्ताव और उचित प्रक्रिया के तोड़ा गया, जिससे वे वर्षा ऋतु में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि कार्रवाई के बाद परिवारों के सामने आवास, भोजन और सुरक्षा का संकट उत्पन्न हो गया है।

प्रभावित ग्रामीण बजरंग नेताम ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा उनके घर, मेड़ और जल स्रोत को नुकसान पहुंचाया गया। वहीं भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष हेमसिंह मौर्य ने कहा कि संगठन की टीम ने मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में अन्य लोगों के मकान होने के बावजूद चुनिंदा परिवारों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बस्तर जिला अध्यक्ष रमेश गोल ने भी प्रभावित परिवारों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि पीडि़तों को न्याय और पुनर्वास नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई से आदिवासी और किसान परिवारों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

ज्ञापन में प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री, अस्थायी आवास, स्थायी पुनर्वास और प्रति परिवार 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर वैधानिक कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई है।

उल्लेखनीय है कि वन विभाग का पक्ष पहले ही सामने आ चुका है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि आरक्षित वन क्षेत्र है, जहां बिना वैध वनाधिकार पत्र के कब्जा और खेती की जा रही थी। विभाग का कहना है कि नियमानुसार नोटिस जारी करने और समय देने के बाद ही संयुक्त कार्रवाई की गई थी।


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