कोण्डागांव

जहां कभी गोलियों की गूंज थी, अब विकास की आवाज...
10-Apr-2026 10:05 PM
जहां कभी गोलियों की गूंज थी, अब विकास की आवाज...

जनअदालत देख चुके ग्रामीणों से कलेक्टर ने जनचौपाल में की मुलाकात

प्रकाश नाग

केशकाल, 10 अप्रैल (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)। कभी नक्सल गतिविधियों का गढ़ माने जाने वाले जिले के अंतिम छोर पर बसे चुरेगांव और आसपास के क्षेत्र आज तेजी से बदलाव की नई इबारत लिख रहे हैं। जिस इलाके में कभी कदम रखना भी चुनौती माना जाता था, आज वहीं प्रशासन बेखौफ होकर विकास कार्यों को जमीन पर उतार रहा है।

खौफ के साए में जीता था इलाका

चुरेगांव क्षेत्र को पहले ‘किसकोड़ो एरिया कमेटी’ के नाम से जाना जाता था। यहां नक्सली कमांडर सरिता, कमलेश, जग्गू गोटा, सोनू, रामधर और प्रभाकर जैसे नामों का खौफ लोगों के दिलों में गहराई तक बसा हुआ था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि किसी भी निर्माण कार्य की शुरुआत होते ही नक्सली वाहन जलाकर विरोध जताते थे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के दौरे के दौरान भारी सुरक्षा बल की तैनाती अनिवार्य हुआ करती थी।

बिना सुरक्षा बल पहुंच रहा प्रशासन

31 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने के बाद इस क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। वर्षों से दहशत में जी रहे ग्रामीण अब खुलकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। लोगों के चेहरों पर अब डर नहीं, बल्कि विश्वास और उम्मीद साफ झलक रही है। सबसे बड़ा बदलाव प्रशासनिक पहुंच में देखने को मिला है। अब कोंडागांव जिला कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना बिना सुरक्षा बल के ही अंदुरी, चिंगनार, चुरेगांव, तुमड़ीवाल और कुदुर जैसे सुदूर गांवों तक पहुंच रही हैं। यह बदलाव सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ प्रशासन की सक्रियता और आत्मविश्वास को भी दर्शाता है।

अब योजनाएं जमीन पर

पहले जहां सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती थीं, अब वे सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं। प्रशासन गांवों में शिविर लगाकर योजनाओं की जानकारी दे रहा है और पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही लाभ दिलाया जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जा रहा है। चुरेगांव और आसपास के क्षेत्रों में अब सडक़, बिजली, पानी, राशन और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीणों का शासन-प्रशासन पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्र में विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में नई योजनाएं शुरू हो रही हैं, जो इस सुदूर इलाके को मुख्यधारा से जोडऩे में अहम भूमिका निभा रही हैं।

शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य- कलेक्टर

कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने कहा कि सरकार के संकल्प के अनुरूप बस्तर में नक्सलवाद अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि जो गांव अब तक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए थे, उन्हें तेजी से जोड़ा जा रहा है। हमारी कोशिश है कि सुदूर क्षेत्रों में शिविर लगाकर ग्रामीणों को उनके गांव में ही समाधान मिले, ताकि उन्हें 40-50 किलोमीटर दूर मुख्यालय तक न जाना पड़े। वही शासन की हर एक योजनाओं को गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है इसलिए अंतिम छोर में शिविर लग रहे हैं ।

शिविर ग्रामीणों के लिए लाभदायक- जिपं सदस्य कपिल

जिला पंचायत सदस्य कपिल नाग ने कहा कि सुदूर इलाकों में लगाए जा रहे प्रशासनिक शिविर ग्रामीणों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर द्वारा घंटों तक ग्रामीणों के बीच बैठकर समस्याएं सुनना एक सकारात्मक पहल है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्र में तेजी से विकास होगा।

डर से विकास तक नई कहानी लिख रहा चुरेगांव

जो क्षेत्र कभी भय और असुरक्षा का प्रतीक था, आज वही क्षेत्र विकास और विश्वास की नई मिसाल बन चुका है। नक्सल मुक्त होने के बाद चुरेगांव जैसे इलाकों में प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से एक नई कहानी लिखी जा रही है— एक ऐसी कहानी, जिसमें डर नहीं, बल्कि विकास की जीत हो रही है।  इस दौरान जिला पंचायत सदस्य कपिल नाग, जनपद उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माला, जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, एसडीएम आकांक्षा नायक, तहसीलदार विजय मिश्रा , एसडीओ फारेस्ट सुषमा मंडावी समेत स्थानीय सरपंच, जनपद सदस्य वार्ड पंच समेत सभी विभागों के अधिकारी कर्मचारी एवं ग्रामीण जन मौजूद रहे ।


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