कोण्डागांव
ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ भेदभाव, गैस सिलेंडर वितरण में देरी से बढ़ी नाराजगी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
केशकाल, 24 मार्च। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर वितरण को लेकर अब असमानता का मुद्दा गहराता जा रहा है। जहां शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को महज 25 दिनों के भीतर गैस रिफिल आसानी से उपलब्ध हो जा रहा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को 45 दिनों तक लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस व्यवस्था को लेकर ग्रामीण इलाकों में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।
ग्रामीण उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसियां और संबंधित विभाग उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उनका कहना है कि हर बार की तरह इस बार भी ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी की जा रही है, जबकि गैस जैसी बुनियादी सुविधा सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
गैस एजेंसी का काट रहे चक्कर
स्थिति उस समय और गंभीर हो जाती है, जब निर्धारित 45 दिनों की अवधि पूरी होने के बाद भी उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ओटीपी नहीं पहुंचता । समस्या सिर्फ देरी तक सीमित नहीं है, बल्कि ओटीपी आधारित सिस्टम भी ग्रामीणों के लिए बड़ी बाधा बन गया है। कई उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ओटीपी समय पर नहीं पहुंचता, जिससे गैस बुकिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया अटक जाती है। नेटवर्क की कमी और तकनीकी दिक्कतों के कारण यह समस्या और गंभीर हो गई है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्हें बार-बार गैस एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि गैस वितरण में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इस तरह के अंतर को तुरंत समाप्त किया जाए। साथ ही, ओटीपी जैसी तकनीकी समस्याओं का शीघ्र समाधान कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
फिर से लकड़ी के लिए पेड़ों को काटने में मजबूर ग्रामीण
ग्रामीण परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में लकड़ी, उपले और अन्य पारंपरिक ईंधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल उनका समय और श्रम बढ़ रहा है, बल्कि धुएं के कारण स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वहीं इस मामले में खाद्य निरीक्षक गुलशन ठाकुर का कहना है कि गैस सिलेंडर वितरण के लिए ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए 45 दिन और शहरी क्षेत्र में 25 दिन तय की गई है। पूरी व्यवस्था उच्च स्तर से निर्धारित की गई है। खाद्य अधिकारियों ने हा कि वे केवल निर्देशों का पालन करते हैं और ओटीपी आधारित सिस्टम भी ऊपर से लागू किया गया है। जब तक उपभोक्ता के मोबाइल पर ओटीपी नहीं आएगा, तब तक गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना संभव नहीं है।


