कोण्डागांव
निराकरण नहीं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 18 मार्च। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने अपनी लंबित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को कोण्डागांव एसडीएम कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। फेडरेशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों का जल्द निराकरण नहीं किया गया, तो संगठन अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।
जिला संयोजक शिवराज सिंह ठाकुर और निर्मल शार्दूल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठन से पूर्व कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने का वादा किया गया था, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है। इससे प्रदेश के कर्मचारी-अधिकारी वर्ग में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से जुलाई 2016 से लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स की राशि को जीपीएफ खाते में समायोजित करने, चार स्तरीय पदोन्नति वेतनमान लागू करने, शिक्षकों की सेवा गणना, सहायक शिक्षकों व पशु चिकित्सा अधिकारियों को क्रमोन्नति वेतनमान देने, पंचायत सचिवों के शासकीयकरण, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया को सरल करने, आंगनबाड़ी व अन्य विभागों की वेतन विसंगतियों को दूर करने सहित 11 प्रमुख मांगें शामिल हैं।
फेडरेशन के अनुसार, प्रदेश भर के लगभग 132 मान्यता प्राप्त एवं गैर-मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों का समर्थन उन्हें प्राप्त है। ऐसे में यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि फेडरेशन द्वारा पूर्व में भी कई चरणों में शासन-प्रशासन को पत्राचार एवं आंदोलन के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इसी के चलते कर्मचारियों में असंतोष गहराता जा रहा है। फेडरेशन ने शासन से मांगों पर त्वरित निर्णय लेने की अपील करते हुए चेताया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो पूरे प्रदेश में एकजुट होकर कर्मचारी-अधिकारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।


