कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 27 फरवरी। शहर के मध्य स्थित मरारपारा क्षेत्र में संचालित एक आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर कच्चे किराए के मकान में चल रहा है, जो नन्हे बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। जिला मुख्यालय क्षेत्र में लंबे समय से दर्जनभर से अधिक बच्चे इसी असुरक्षित भवन में शिक्षा और पोषण सेवाएं लेने को मजबूर हैं। बारिश या मौसम के बदलाव के दौरान भवन के कभी भी ढहने की आशंका बनी रहती है।
केंद्र की सहायिका और कार्यकर्ता के अनुसार, भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी संबंधित विभाग को पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अब तक न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और न ही किसी वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की गई है। इससे पालकों में गहरी चिंता और असंतोष देखा जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि केंद्र में पदस्थ कार्यकर्ता की कार्यशैली को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि वे कई बार ड्यूटी के दौरान केंद्र से अनुपस्थित रहती हैं, जिससे बच्चों को शासन की योजनाओं के तहत मिलने वाली प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने प्रशासन तथा महिला एवं बाल विकास विभाग छत्तीसगढ़ से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित भवन उपलब्ध कराया जाए और लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक आंगनबाड़ी केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है — जहां बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


