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खैरागढ़ में दुर्लभ पांडुलिपि मिली
17-May-2026 9:32 PM
खैरागढ़ में दुर्लभ पांडुलिपि मिली

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
खैरागढ़, 17 मई।
देशव्यापी ‘ज्ञान भारतम् पांडुलिपि सर्वेक्षण’ अभियान के तहत खैरागढ़ में एक दुर्लभ पांडुलिपि प्राप्त हुई है। यह पांडुलिपि खैरागढ़ के ठाकुर पारा निवासी और सेवानिवृत्त शिक्षक गोपाल दीक्षित से प्राप्त हुई।
प्रशासन के अनुसार, जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल, अतिरिक्त कलेक्टर सुरेंद्र के ठाकुर, अनुविभागीय अधिकारी टंकेश्वर साहू तथा सर्वेक्षण दल के सदस्य डॉ. मंगलानंद झा के प्रयासों से यह दस्तावेज सामने आया। डॉ. मंगलानंद झा इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में सहायक प्राध्यापक हैं।

प्राप्त पांडुलिपि में घोड़ों से संबंधित जानकारी दर्ज है। इसमें घोड़ों की नस्ल, स्वभाव, रोग एवं उपचार, रखरखाव, आहार तथा घुड़सवारी से जुड़े विषयों का उल्लेख किया गया है। जानकारी के अनुसार, इस ग्रंथ को वर्ष 1887 में ठाकुर हिरावल सिंह द्वारा हस्तलिखित रूप में तैयार किया गया था। बताया गया कि हिरावल सिंह, सूबेदार गयाराम सिंह के चतुर्थ पुत्र थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1858 को तथा निधन 20 अप्रैल 1965 को हुआ था।
गोपाल दीक्षित ने बताया कि हिरावल सिंह खैरागढ़ स्टेट में घुड़सवारी के लिए जाने जाते थे। सर्वेक्षण के दौरान 12 फरवरी 1902 को राजा कमल नारायण सिंह द्वारा तहसीलदार दयाराम सिंह को लिखा गया एक पत्र भी प्राप्त हुआ है।
इसके अलावा, विक्टोरिया हाई स्कूल, वर्तमान पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हाई स्कूल, की 1885 से 1 दिसंबर 1922 तक की हस्तलिखित प्रवेश पंजी भी मिली है। पंजी में खैरागढ़ स्टेट के राजा कमल नारायण सिंह का नाम क्रमांक एक पर दर्ज बताया गया है, हालांकि वह अब धुंधला हो चुका है।

सर्वेक्षण दल के सदस्य डॉ. मंगलानंद झा ने इस कार्य में सहयोग के लिए गोपाल दीक्षित के प्रति आभार व्यक्त किया।


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