खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
तीन दिनी खैरागढ़ महोत्सव का उद्घाटन
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
खैरागढ़, 20 नवंबर। तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव का मुख्य अतिथि सांसद संतोष पांडे ने विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पंडरिया विधायक भावना बोहरा तथा विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष, प्रियंका खम्हन ताम्रकार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह सहित पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव कोमल जंघेल, नगर पालिका अध्यक्ष गिरिजा चंद्राकर मंचस्थ थी, वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डॉ. लवली शर्मा ने की।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह ने कहा कि संगीत विश्वविद्यालय को देश-विदेश में प्रतिस्थापित करने में इस महोत्सव का बहुत बड़ा योगदान है। 12वीं की पढ़ाई के बाद डॉक्टर ,इंजीनियर या वकील बनने के लिए अच्छे नंबरों से पास होना पड़ता है लेकिन एक संगीत कलाकार होने के लिए सतत परिश्रम और साधना करना पड़ता है तभी वह अपने आप को एक प्रतिष्ठित कलाकार के रूप में स्थापित कर पाता है।
श्री सिंह ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय का नाम राजकुमारी इंदिरा होना चाहिए, तभी राजा -रानी तथा जिसकी स्मृति में यह विश्वविद्यालय निर्मित है राजकुमारी इंदिरा उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विशिष्ट अतिथि भावना बोहरा ने कहा -संगीत विश्वविद्यालय से छत्तीसगढ़ की पहचान देश ही नहीं विदेश में भी बनी हुई है। चित्र प्रदर्शनी का उल्लेख करते हुए उन्होंनेेे कहा कि कला को समझने व देखने का समझ व परख भी होना चाहिए। यहां पढऩे वाले विद्यार्थियों की पहचान अपने आप अलग से हो जाती है क्योंकि वह अपने संगीत और सूर की धुन में रहते हैं। मैं भी पूर्व वक्ता की बात से सहमत हूं कि इस विश्वविद्यालय का नाम राजकुमारी इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय होना चाहिए।
मुख्य अतिथि संतोष पांडे ने कहा कि संगीत और कला मनुष्य को आनंद के साथ-साथ शांति और निरोग प्रदान करता है। संगीत के रागों में काफी विशेषता है और आज विश्व भर में किए गए विभिन्न प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है की संगीत केवल मनोरंजन या आनंद का माध्यम नहीं बल्कि निरोग और सुखी जीवन का आधार भी है।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डॉ. लवली शर्मा ने कहा की सभी के सहयोग से खैरागढ़ महोत्सव जैसा भव्य आयोजन हो रहा है। नगर सहित सभी क्षेत्रों में विश्वविद्यालय में होने वाले खैरागढ़ महोत्सव को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला। विश्वविद्यालय के प्रति सभी को लगाव और जुड़ाव है जिसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि महोत्सव के प्रारंभ से पूर्व अंबेडकर चौक के पास सभी के सहयोग से 51 फीट ऊंचा तिरंगा फहराकर महोत्सव का आगाज किया गया। इसमें नगर के सभी गणमान्य नागरिक व प्रशासन का सहयोग मिला है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित, राजकुमारी इंदिरा के तेल चित्र पर माल्यार्पण कर व छत्तीसगढ़ राज्य गीत से हुआ कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी द्वारा समस्त अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शन किया गया।
अपार जनसमूह ने उठाया आनंद
19 नवंबर से आयोजित तीन दिवसीय खैरागढ़ महोत्सव का शुभारंभ इंदिरा कला संगीत विश्व विद्यालय के लोक संगीत एवं कला विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ के लोक नृत्य एवं गीत से हुआ। इसके पश्चात अंतरराष्ट्रीय तबला वादक गौरी शंकर कर्मकार अमेरिका का एकल तबला वादन हुआ, जिसमें आपने तीन ताल में मिश्र जाति का कायदा, रेला व टुकड़े आदि प्रस्तुत किये।
अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कलाकार एवं संगीतकार सैक्सोफोन वादक बेंजामिन बून व अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सितार वादक डॉ. लवली शर्मा के द्वारा ‘प्रतिध्वनि: पूरब से पश्चिम तक’ कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। देसी और विदेशी धुन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करते हुए इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी राज गीत अरपा पैरी के धार एवं वंदे मातरम नेशनल सॉन्ग के साथ-साथ विभिन्न रागों की प्रस्तुति दी गई।
विदुषी आस्था गोस्वामी के द्वारा ‘मन वृंदावन: उपशास्त्रीय गायन’ के तहत श्रृंगार गीत प्रस्तुत किए गए। विश्वविद्यालय के थिएटर विभाग के विद्यार्थियों द्वारा पेइंग गेस्ट शीर्षक से नाटक भी प्रस्तुत किया गया।
अंत में जितेंद्र कुमार साहू एवं समूह बालोद के सोनहा बादर मंच से छत्तीसगढ़ी लोकगीत एवं नृत्य की प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।


