जशपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जशपुरनगर, 5 अप्रैल। वन सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सक्रिय और सकारात्मक पहल की है। गर्मी के मौसम में बढ़ती आग की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए वन परिक्षेत्र सहायक द्वारा आग की सूचना के लिए टोल फ्री नंबर मनोरा के लिए +919589291945 +919691960834 और गजमा के लिए +918319282712 सिकरी और ओरडीह के लिए +917067834069 जारी किया गया है। इस कदम का उद्देश्य है कि आम नागरिकों, ग्रामीणों और वन क्षेत्र से जुड़े लोगों की सहभागिता से त्वरित सूचना प्राप्त कर आग की घटनाओं पर शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण पाना। वन परिक्षेत्र सहायक कमला भगत और उनकी टीम मंजू तिर्की, प्रतिमा एक्का, ओम प्रकाश राम ने स्पष्ट कहा है कि जंगलों की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। इसी सोच के साथ सहायक कमला भगत अपनी टीम मंजू तिर्की, प्रतिमा एक्का, और ओम प्रकाश राम के साथ क्षेत्र में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों, वन समितियों, युवाओं और चरवाहों को आग से होने वाले नुकसान, रोकथाम के उपायों तथा कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है।
जगह-जगह पंपलेट वितरण, मुनादी और बैठकों के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि एक छोटी सी चिंगारी भी हजारों हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान पहुंचा सकती है। सहायक कमला भगत, मंजू तिर्की, प्रतिमा एक्का और ओम प्रकाश राम ने बताया कि पूर्व में अग्नि सत्र के प्रारंभ में अग्नि सुरक्षा और रोकथाम हेतु नुक्कड़ नाटक एवं ग्राम स्तरीय बैठकों के माध्यम से भी जनजागरूकता का विशेष प्रयास किया गया है।
इन कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीणों को सरल और प्रभावी तरीके से समझाया गया कि लापरवाही से लगी छोटी आग भी बड़े विनाश का कारण बन सकती है। स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक माध्यमों का उपयोग कर लोगों को वन संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया गया, जिसका सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला रहा है।
सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
वन परिक्षेत्र सहायक कमला भगत और उनकी टीम मंजू तिर्की, प्रतिमा एक्का औए ओम प्रकाश राम ने कहा कि मनोरा विकासखंड वन परिक्षेत्र केवल एक वन क्षेत्र नहीं, बल्कि जैव विविधता, प्राकृतिक संतुलन और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यहां की हरियाली और वन्यजीव आने वाली पीढिय़ों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। प्रशासन की यह पहल संदेश देती है कि संरक्षण केवल कानून से नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना और सहयोग से संभव है। आवश्यकता है कि हर नागरिक जंगल को अपनी संपत्ति समझे और उसकी रक्षा के लिए सजग रहे। एक कॉल, जंगल सुरक्षित का यह संदेश क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा भर रहा है। जनभागीदारी, जागरूकता और प्रशासनिक तत्परता से निश्चित ही मनोरा विकासखंड के वन परिक्षेत्र को आग जैसी आपदाओं से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
आग से होने वाले नुकसान
वन परिक्षेत्र सहायक कमला भगत ने आगे कहा कि वन क्षेत्र में आग लगने से सबसे पहले पेड़-पौधों और झाडिय़ों को नुकसान पहुंचता है। सूखी पत्तियां और घास तेजी से जलती हैं, जिससे आग फैलने में समय नहीं लगता। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो जाते हैं। कई बार छोटे जीव-जंतु और पक्षी आग की चपेट में आकर असमय मौत का शिकार हो जाते हैं। औषधीय वनस्पतियां और दुर्लभ प्रजातियां भी नष्ट हो जाती हैं। आग से मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत प्रभावित होती है, जिससे भविष्य में पौधों का पुनर्जनन बाधित होता है। धुएं के कारण वायु प्रदूषण बढ़ता है और आसपास के गांवों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जल स्रोतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विभाग ने आग की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
जनभागीदारी से मजबूत होगा संरक्षण
वन विभाग द्वारा वन कर्मियों, वन सुरक्षा समिति, और स्थानीय लोगों की सहभागिता से निगरानी तंत्र को सशक्त किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, फायर लाइन की सफाई और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। विभाग का मानना है कि समय पर मिली सूचना से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। वन परिक्षेत्र सहायक ने अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को जंगल में धुआं, आग या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत टोल फ्री नंबर मनोरा के लिए +919589291945, +91969196083491, गजमा के लिए +918319282712 सिकरी और ओरडीह के लिए +917067834069 पर सूचना दें।


