जशपुर
पौष पूर्णिमा पर तीन दिनी परंपरागत मेले में हजारों भक्तों ने की खुशहाली की कामना
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जशपुरनगर, 5 जनवरी। पौष पूर्णिमा के अवसर पर विकासखंड पत्थलगांव के अंतर्गत ग्राम तमता स्थित केशलापाठ पहाड़ पर आयोजित तीन दिवसीय परंपरागत केशलापाठ मेला में कलेक्टर रोहित व्यास शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 300 से अधिक सीढिय़ों को चढ़ते हुए पहाड़ के ऊपर पहुंचकर देव स्थल में विधिवत दर्शन कर जिलेवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
हर वर्ष छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्व छेरछेरा के दूसरे दिन केशलापाठ पहाड़ पर लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले में बड़ी संख्या में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। कलेक्टर ने श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि शासन द्वारा केशलापाठ देव स्थल पर आने वाले दर्शनार्थियों की सुविधाओं के लिए मूलभूत अधोसंरचना विकसित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि यहां सामुदायिक शौचालय की स्वीकृति दी जा चुकी है तथा देव स्थल तक पहुंचने के लिए सडक़ निर्माण कार्य भी शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने मंच निर्माण को लेकर विधायक द्वारा की गई घोषणा की जानकारी देते हुए कहा कि यह कार्य भी अगले वर्ष तक पूर्ण हो जाएगा। साथ ही वन विभाग के समन्वय से परिसर के सौंदर्यीकरण हेतु कार्ययोजना तैयार कर इसे धरातल पर उतारा जाएगा। कलेक्टर ने मेले में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं एवं व्यवसाइयों से शांति एवं सौहार्द बनाए रखते हुए दर्शन एवं मेला आयोजन में सहयोग करने की अपील की।
ग्राम तमता के केसला पहाड़ पर स्थित केशलापाठ देव स्थल में आयोजित मेला में आज हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर अपने परिवार एवं गांव की खुशहाली की कामना की। परंपरा के अनुसार लोग पहले देव स्थल में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं, तत्पश्चात मेले का आनंद उठाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा कई दशकों से निरंतर चली आ रही है और पौष पूर्णिमा के अवसर पर छेरछेरा पर्व के दूसरे दिन यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार आदिकाल में पांडव भीम ने यहां गांव के लोगों को असुरों के आतंक से मुक्त कराने हेतु बकासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिसके कारण केशला पहाड़ को विशेष पूज्य देव स्थल के रूप में जाना जाता है। देव स्थल के समीप स्थित एक प्राचीन कुंड में वर्षभर जल भरा रहता है, जिसमें स्नान कर श्रद्धालु स्वयं को शुद्ध करते हैं और फिर मंदिर में दर्शन हेतु पहुंचते हैं। ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां मन्नत मांगने की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर पुन: देव स्थल पहुंचकर नारियल का प्रसाद अर्पित करते हैं। मेले के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, ग्राम प्रतिनिधि, आयोजन समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


