जशपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जशपुरनगर, 26 फरवरी। तीन सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ (पंजी. 409) के बैनर तले जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के दौरान हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लगा रहा और कार्यकर्ताएं रणजीता स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर एकत्र होकर प्रदर्शन करती नजर आईं।
संयुक्त मंच के आह्वान पर 26 एवं 27 फरवरी को प्रदेशभर में काम बंद कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में उनकी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया। संघ की जिलाध्यक्ष कविता यादव ने कहा कि आंगनबाड़ी व्यवस्था को देश में संचालित हुए 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं और महिला एवं बाल विकास विभाग गोल्डन जुबली वर्ष मना रहा है। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं विभिन्न शासकीय योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं, साथ ही कोविड महामारी, निर्वाचन कार्य और अन्य जिम्मेदारियों में भी योगदान देती रही हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में केंद्र सरकार की ओर से कार्यकर्ताओं को ?4,500 और सहायिकाओं को ?2,250 प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। संघ का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद से मानदेय में वृद्धि नहीं हुई है। राज्य स्तर पर भी हाल के बजट में कोई नई घोषणा नहीं होने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
प्रमुख तीन मांगें
1. शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए, अन्य विभागों की तरह नीति बनाकर नियमित किया जाए।
2. न्यूनतम वेतन स्वीकृत किया जाए- नियमितीकरण तक कार्यकर्ता को 26,000 एवं सहायिका को 22,100 प्रतिमाह वेतन देने की मांग।
3. सामाजिक सुरक्षा प्रावधान- सेवानिवृत्ति पर पेंशन/ग्रेच्युटी, आकस्मिक मृत्यु पर एकमुश्त सहायता और समूह बीमा की सुविधा सुनिश्चित की जाए।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 8 मार्च तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 9 मार्च को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रायपुर पहुंचकर विधानसभा घेराव करेंगे।
प्रशासन या शासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।


