अंतरराष्ट्रीय
युद्ध का असर सबसे ज्यादा महिलाओं और लड़कियों पर पड़ रहा है और गाजा इसका एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है. यूएन वुमन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच गाजा में 38,000 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों की मौत हुई. यह आंकड़ा गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा पर आधारित है, जिसे बाद में कम रिपोर्टिंग को ध्यान में रखते हुए संशोधित किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि “महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मिलकर कुल मौतों का आधे से ज्यादा हिस्सा हैं” और असल संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई शव अब भी मलबे में दबे हैं.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि जब-जब बड़े पैमाने पर नागरिक ढांचे जैसे घर, स्कूल और शरण स्थल तबाह हुए, तब महिलाओं और बच्चों की मौतों में भी उछाल आया. करीब 11,000 महिलाएं और लड़कियां स्थायी विकलांगता का शिकार हुई हैं. संघर्ष विराम के बावजूद हालात अब भी गंभीर हैं, जहां सीमित मदद ही पहुंच पा रही है और खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ महिलाओं के लिए जरूरी स्वच्छता उत्पादों की भी कमी बनी हुई है.
हिंसा के अलावा, युद्ध का एक छिपा असर भी है, महिलाओं के लिए जरूरी स्वास्थ्य और प्रजनन सेवाओं का टूट जाना. यूएन की अधिकारी सोफिया काल्टॉर्प ने कहा, “हम ऐसे संघर्षों में तेजी देख रहे हैं, जैसा 1990 के दशक के बाद नहीं देखा गया और इसका असर खास तौर पर महिलाओं और लड़कियों पर पड़ रहा है.” अस्पतालों और मैटरनिटी वार्डों के नष्ट होने से हालात और बिगड़े हैं, जिससे महिलाओं की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं. (dw.com/hi)


