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जापान की नेट ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन मात्रा साल 25 में 1.9 प्रतिशत घटकर 99.4 करोड़ टन रह गई, जो बीते एक दशक से अधिक की अवधि में सबसे कम स्तर है. पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार यह पहली बार है जब देश का विशुद्ध उत्सर्जन एक अरब टन से नीचे गया है. यह गिरावट आंशिक रूप से परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में मामूली बढ़ोतरी के कारण हुई.
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि उत्सर्जन में कमी का एक प्रमुख कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन घटने से ऊर्जा खपत का कम होना भी है. वित्तीय वर्ष 2024 में जापान की 67.5 प्रतिशत बिजली अब भी कोयला, गैस और तेल से आई, जो पिछले वर्ष के 68.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है. सरकार का लक्ष्य अगले 15 वर्षों में इस हिस्से को घटाकर 30–40 प्रतिशत करना है.
हालांकि जलवायु कार्यकर्ता इस प्रगति को अपर्याप्त मानते हैं. क्लाइमेट चेंज पर काम करने वाली संस्था किको नेटवर्क की अध्यक्ष मीए असाओका ने कहा कि ना तो कोयला आधारित बिजली उत्पादन में बड़ी कमी आई है और ना ही नवीकरणीय ऊर्जा में तेज बढ़ोतरी. जापान ने 2030 तक 2013 के स्तर से 46 प्रतिशत उत्सर्जन कटौती और 2050 तक कार्बन न्यूट्रलिटी का लक्ष्य तय किया है, लेकिन हाल ही में ऊर्जा संकट के चलते कोयला बिजली संयंत्रों पर कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने के फैसले ने सवाल खड़े कर दिए हैं. (dw.com/hi)


