अंतरराष्ट्रीय
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने श्रीलंका के लिए 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी दे दी है. आईएमएफ ने श्रीलंका को आर्थिक सुधारों में तेजी लाने के लिए भी कहा है, ताकि 2022 के बाद आयी आर्थिक बेहतरी को बरकरार रखा जा सके और मध्य पूर्व संकट से उपजे झटकों का सामना किया जा सके. आईएमएफ ने चार साल के 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की हालिया किश्त जारी करते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं, जिनमें बिजली कीमतों की लागत वसूली भी शामिल है.
ईरान युद्ध के चलते श्रीलंका में ईंधन की किल्लत हो गई है और कीमतें भी करीब एक तिहाई बढ़ गई हैं. इस बीच सरकार ने कहा है कि वह ईंधन पर सब्सिडी देने में 20 करोड़ डॉलर खर्च करेगी. आईएमएफ ने इन ऊर्जा सब्सिडियों का विरोध किया है. आईएमएफ चाहता है कि श्रीलंका बिजली उत्पादन की लागत को, बिजली बिलों के जरिए लोगों से वसूले. वहीं, श्रीलंका छोटे उपभोक्ताओं को बिजली बिल पर सब्सिडी देता है.
श्रीलंका ने साल 2022 में अपनी सबसे गंभीर आर्थिक मंदी का सामना किया था. इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी लेकिन पिछले साल नवंबर में चक्रवाह दित्वाह ने श्रीलंका के बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया. विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, श्रीलंका को 4.1 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. जिसके बाद श्रीलंका को आपदा राहत के लिए आईएमएफ से 20 करोड़ डॉलर का कर्ज मांगना पड़ा. (dw.com/hi)


