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बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले मंत्री कौन हैं?
18-Feb-2026 10:39 PM
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले मंत्री कौन हैं?

बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद सरकार का गठन हो चुका है। मंगलवार को नए सांसदों और तारिक रहमान मंत्रिमंडल ने पद की शपथ ली।

13वें राष्ट्रीय संसद चुनाव में दो-तिहाई सीटें जीतने के बाद बीएनपी ने मंगलवार को सरकार बनाई है। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तारिक़ रहमान को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।

वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने नवनिर्वाचित संसद सदस्यों को शपथ दिलाई।

आम चुनाव में 299 सीटों में से बीएनपी ने अकेले 209 और उसके गठबंधन ने कुल 212 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है।

तारिक़ रहमान मंत्रिमंडल में कुल 50 लोगों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली है। प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान के अलावा इनमें 25 ने कैबिनेट मंत्री और 24 ने राज्य मंत्री के तौर पर पद की शपथ ली है।

इस मंत्रिमंडल में दो सदस्य बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। निताई रॉय चौधरी हिंदू समुदाय और दीपेन दीवान बौद्ध समुदाय से आते हैं। दोनों ने ही कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली है।

बीबीसी न्यूज़ बांग्ला के मुताबिक़, निताई रॉय चौधरी को संस्कृति मंत्रालय जबकि दीपेन दीवान को चटगांव पहाड़ी क्षेत्र कार्य मंत्रालय दिया गया है।

कौन हैं निताई रॉय चौधरी

बांग्लादेश के आम चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले चार लोगों ने जीत दर्ज की है। ये सभी सरकार का गठन करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के ही उम्मीदवार थे।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इनमें हिंदू समुदाय के दो उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। इनके नाम गोयेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी हैं।

बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक़, 77 वर्षीय निताई रॉय चौधरी पेशे से वकील रहे हैं और उनका राजनीति से पुराना वास्ता रहा है। वो बीएनपी के वाइस चेयरमैन भी हैं।

इसके अलावा निताई रॉय चौधरी युवा एवं खेल मामलों के मंत्री रह चुके हैं।

इस चुनाव में उन्होंने मागुर-2 सीट से जीत दर्ज की है। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को 30 हज़ार से अधिक वोटों से हराया है।

साल 2024 में शेख़ हसीना सरकार के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा के कई मामले सामने आए हैं।

भारत ने इन मामलों में सख़्त आपत्ति दर्ज कराई थी और बांग्लादेश से अपील की थी कि वो हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए कड़े कदम उठाए।

ढाका ट्रिब्यून के साथ इंटरव्यू के दौरान निताई रॉय चौधरी से सवाल पूछा गया था कि अगर भविष्य में बीएनपी की सरकार बनती है, तो वह अल्पसंख्यकों के लिए क्या ख़ास क़दम उठाएगी?

इस सवाल पर उन्होंने जवाब दिया था, ‘बीएनपी धार्मिक अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों की सोच को नहीं मानती। हम बांग्लादेश में सभी के लिए बराबर अधिकारों में विश्वास करते हैं। एक मुसलमान के अधिकार एक हिंदू के अधिकारों से अलग नहीं हैं। बीएनपी सभी के लिए बराबर अधिकारों के लिए मज़बूती से खड़ी है।’

‘बांग्लादेश में ज़्यादातर आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है, जहां सांप्रदायिकता कम है। शहरी इलाकों में भी सांप्रदायिकता बहुत कम है। हालांकि, हमने देखा है कि अवामी लीग अलग-अलग तरीकों से सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है। अगर बीएनपी सत्ता में आती है, तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कोई भेदभाव न हो क्योंकि हम किसी भी तरह के भेदभाव का समर्थन नहीं करते हैं।’

दीपेन दीवान कौन हैं?

पेशे से वकील दीपेन दीवान ने रंगामाटी संसदीय सीट से बीएनपी के टिकट पर जीत दर्ज की है।

दीवान ने निर्दलीय उम्मीदवार को एक नज़दीकी मुक़ाबले में मात दी है। दीवान रंगामाटी के बीएनपी जि़ला अध्यक्ष भी रहे हैं। चकमा समुदाय से आने वाले 62 वर्षीय दीवान को चटगांव पहाड़ी क्षेत्र कार्य मंत्रालय दिया गया है। समाचार वेबसाइट मातृभूमि के मुताबिक़, दीवान बौद्ध समुदाय से आते हैं लेकिन उनकी धार्मिक पहचान को कुछ लोग हिंदू समझते हैं। रंगामाटी जिला चटगांव पहाड़ी क्षेत्र के अंतर्गत आता है जिसकी जिम्मेदारी दीवान को दी गई है।

चुनावी जीत के बाद न्यू एज मीडिया समूह को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने वादा किया था कि वो सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए जि़ले के सभी निवासियों के साथ मिलकर काम करेंगे।

उन्होंने कहा था कि वो जि़ले में विकास और महिलाओं के सशक्तीकरण के संतुलन को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि विकास की कोशिशों में कोई भेदभाव नहीं होगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि जैसे खास सेक्टर पर उनका फोकस रहेगा। (bbc.com/hindi)


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