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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग नेता शेख़ हसीना के बेटे सजीब वाजिद ने बीबीसी के ‘न्यूज़आवर’ कार्यक्रम में अपनी मां के वापस बांग्लादेश जाने, देश में हुए चुनावों और अन्य मुद्दों पर बात की है.
सजीब वाजिद से पूछा गया कि बांग्लादेश का चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा और राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल देखने को मिला. क्या यह उस राजनीति को दरकिनार करना नहीं है, जिसे अवामी लीग ने बढ़ावा दिया था?
सजीब वाजिद ने कहा, “मैं नहीं समझता हूं कि चुनावों में प्रतिस्पर्धा थी क्योंकि देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी (अवामी लीग) पर चुनाव लड़ने को लेकर पाबंदी लगा दी गई. यह वास्तव में प्रतिस्पर्धी नहीं था.”
बांग्लादेश में जुलाई चार्टर और संविधान संशोधन के मुद्दे पर हुए जनमत संग्रह में भारी संख्या में लोगों ने इसका समर्थन किया है. क्या इसका यह मतलब नहीं है कि लोग पुराने समय से पूरी तरह आज़ाद होना चाहते हैं?
सजीब वाजिद ने इस पर कहा, “यह सही है. हम भी इतिहास से छुटकारा चाहते हैं. बीएनपी बांग्लादेश में एक अन्य बड़ी पार्टी है और वो सत्ता में वापस आए हैं. जब वो सत्ता में थे यही बात कही जाती थी.”
"बीएनपी और अवामी लीग ब्रिटेन की लेबर पार्टी और टोरी की तरह है. इनमें किसी की भी राजनीति दूसरे के बग़ैर नहीं चल सकती. हो सकता है कि अभी सब खुश हों कि उन्होंने चुनाव जीत लिया है. लेकिन अवामी लीग बांग्लादेश के चुनावों में बड़ा फ़ैक्टर है. हमारे पास 40 फ़ीसदी वोट हैं. जातीय पार्टी के पास 5 से 10 फ़ीसदी वोट हैं. आप उनकी अनदेखी नहीं कर सकते."
उन्होंने कहा, "हमें चुनाव नहीं लड़ने दिया गया. लेकिन ऐतिहासिक तौर पर अवामी लीग के पास 40 फ़ीसदी वोट रहे हैं. बीएनपी यह चुनाव जीतने ही वाला था क्योंकि उनके सामने कोई नहीं था."
वाजिद से कार्यक्रम में पूछा गया कि 'क्या आपने इन चुनावों पर अपनी मां से बात की है?'
उन्होंने कहा, "नहीं मैं बात नहीं कर पाया हूं. मैं अभी काफ़ी व्यस्त हूं."
सजीब वाजिद से पूछा गया कि अगर बीएनपी औपचारिक तौर पर शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण की गुज़ारिश करे तो क्या वो बांग्लादेश लौटेंगी?
इस पर वाजिद ने कहा, “भारत में कानून का शासन है. बीएनपी प्रत्यर्पण के लिए गुज़ारिश कर सकती है लेकिन इसके लिए कुछ प्रक्रिया होती है और बीएनपी को उन बाधाओं को पार करना होगा. इसलिए कोई रास्ता ही नहीं है कि वो प्रत्यर्पण करा सकते हैं.”
"हां वो एक दिन ज़रूर लौटेंगी. मेरी मां रिटायर होना चाहती हैं और अपने देश में रहना चाहती हैं. वो दूसरे देश में रहना नहीं चाहती हैं. एक दिन वो अपने देश ज़रूर लौटेंगी." (bbc.com/hindi)


