अंतरराष्ट्रीय
नयी दिल्ली, 22 जनवरी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने और संभवत: वैश्विक संघर्षों का समाधान करने की दिशा में काम करने के लिए प्रस्तावित ‘शांति बोर्ड’ का बृहस्पतिवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में औपचारिक रूप से अनावरण किया, लेकिन भारत इस मौके पर अनुपस्थित रहा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन कई वैश्विक नेताओं में शामिल थे जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।
भारत के अलावा फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी और कई अन्य प्रमुख देश भी न्योते के बावजूद ‘शांति बोर्ड’के अनावरण समारोह से नदारद रहे।
ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस स्थित पहाड़ी रिसॉर्ट में आयोजित वार्षिक विश्व आर्थिक मंच(डब्ल्यूईएफ) के इतर इस समारोह की मेजबानी की।
ट्रंप ने अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए इस बोर्ड को ‘दुनिया के लिए एक बेहद अनोखी पहल’’ बताया।
उन्होंने बोर्ड के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित समारोह में कहा, ‘‘यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर न केवल पश्चिम एशिया में, बल्कि अन्य जगहों पर भी युद्धों को सुलझाने में मदद कर सकता है।’’ हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ किस प्रकार सहयोग करेगा।
पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को ट्रंप के निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत ने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है क्योंकि इसमें कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।
भारत फलस्तीन मुद्दे के लिए ‘दो-राष्ट्र समाधान’ पर जोर दे रहा है, जिसमें इजराइल और फलस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ अगल-बगल रहें।
‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने वाले देशों में अर्जेंटीना, अर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाकिस्तान, मोरक्को, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात(यूएई), सऊदी अरब और वियतनाम शामिल हैं।
जर्मनी, इटली, पैराग्वे, रूस, स्लोवेनिया, तुर्किये और यूक्रेन सहित कई देशों ने निमंत्रण के बावजूद अबतक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।
ट्रंप के ‘शांति बोर्ड’ को अमेरिका द्वारा गाजा और उसके बाहर शांति और स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में पेश किया जा रहा है। इस पहल से अटकलें लगाई जा रही हैं कि ‘शांति बोर्ड’ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी निकाय के तौर पर उभर सकता है।
मूल रूप से, इस ‘शांति बोर्ड’ को गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शासन की देखरेख करने और धन के समन्वय का कार्य सौंपा जाना था,जो इजराइल की सेना की गत दो वर्ष तक चली कार्रवाई के दौरान तबाह हो गया है।
हालांकि, बोर्ड के ‘घोषणापत्र’ में कहा गया है कि यह ‘‘एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो संघर्ष से प्रभावित या खतरे में पड़े क्षेत्रों में स्थिरता को बढ़ावा देने, विश्वसनीय और वैध शासन को बहाल करने और स्थायी शांति सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।’’ इसमें यह भी कहा गया है कि स्थायी शांति के लिए व्यावहारिक निर्णय, सामान्य ज्ञान पर आधारित समाधान और उन दृष्टिकोणों और संस्थानों से अलग होने का साहस आवश्यक है जो अक्सर विफल रहे हैं।
ट्रंप के नेतृत्व में गठित बोर्ड के शीर्ष स्तर में ‘‘विशेष रूप से’’ राष्ट्राध्यक्ष ही शामिल होंगे।
अमेरिका पहले ही घोषणा कर चुका है कि ‘शांति बोर्ड’ गाजा के संघर्ष से शांति और विकास की ओर संक्रमण के दौरान रणनीतिक निगरानी प्रदान करने, अंतरराष्ट्रीय संसाधनों को जुटाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की ट्रंप की 20 सूत्री योजना को पूरा करने में एक आवश्यक भूमिका निभाएगा।
ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 20 सूत्री योजना में गाजा को एक आतंकवाद-मुक्त क्षेत्र बनाना शामिल है जो अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा पैदा न करे और इसे गाजा पट्टी के लोगों के लाभ के लिए पुनर्विसित किया जाए।
व्हाइट हाउस ने पिछले सप्ताह ‘शांति बोर्ड’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए एक संस्थापक कार्यकारी बोर्ड के गठन की घोषणा की।
कार्यकारी समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, पश्चिम एशिया मामलों के लिए अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, व्यवसायी और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा को शामिल किया गया है। (भाषा)


