अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'बोर्ड ऑफ़ पीस' को लेकर कहा है कि 'काश हमें इसकी ज़रूरत नहीं होती'.
ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, "काश हमें ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की ज़रूरत नहीं होती. आप जानते हैं कि मैंने जितनी भी लड़ाइयाँ सुलझाईं, उनमें से किसी में भी संयुक्त राष्ट्र ने मेरी मदद नहीं की."
ग़ज़ा के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक नया 'बोर्ड ऑफ़ पीस' बनाया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़ ये बोर्ड डोनाल्ड ट्रंप की ग़ज़ा शांति योजना का हिस्सा है, लेकिन बोर्ड के चार्टर में ग़ज़ा का कोई उल्लेख नहीं है.
अमेरिका दावा कर रहा है कि उसका ये 'बोर्ड ऑफ़ पीस' एक नए अंतरराष्ट्रीय शांति संगठन के तौर पर काम करेगा.
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर कोई देश इस बोर्ड की स्थायी सदस्यता पाना चाहता है, तो उसे मोटी रकम ख़र्च करनी पड़ेगी.
बोर्ड के गठन के शुरुआती तीन सालों के बाद भी अगर कोई देश इसमें बने रहना चाहता है, तो उसे एक अरब डॉलर यानी क़रीब नौ हज़ार करोड़ रुपए ख़र्च करने पड़ेंगे.
डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में 8 युद्ध रुकवाए हैं. 20 जनवरी को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया है. (bbc.com/hindi)


