अंतरराष्ट्रीय
महिला अधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में एक्स पर एक पोस्ट किया है.
उन्होंने लिखा कि वह ईरान के लोगों के साथ हैं, जो अपना भविष्य ख़ुद तय करने के हक़दार हैं.
मलाला ने लिखा, "ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लड़कियों और महिलाओं की आज़ादी पर लंबे समय से लगे सरकारी प्रतिबंधों से अलग नहीं किया जा सकता, जिसमें शिक्षा सहित सार्वजनिक जीवन के सभी पहलू शामिल हैं."
"ईरान की लड़कियां, दुनिया भर की लड़कियों की तरह, सम्मान के साथ जीने की मांग करती हैं."
उन्होंने लिखा कि 'दशकों से ईरान के लोगों की आवाज़ को दबाया' गया है.
मलाला यूसुफ़ज़ई ने आगे लिखा, "वे (ईरान के लोग) चाहते हैं कि उनकी आवाज़ सुनी जाए और उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य तय करने का अधिकार मिले. वह भविष्य ईरान के लोग को ही तय करना चाहिए और उसमें ईरानी महिलाओं और लड़कियों का नेतृत्व शामिल होना चाहिए न कि बाहरी ताकतों या दमनकारी शासनों का."
साल 2012 में महिला शिक्षा के प्रचार में जुटीं मलाला को तालिबान के चरमपंथियों ने निशाना बनाया था. मलाला नोबेल शांति पुरस्कार विजेता भी हैं. उन्हें साल 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था.
साल 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार संयुक्त रूप से भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफ़ज़ई को "बच्चों और युवाओं के दमन के ख़िलाफ़ उनके संघर्ष और बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए" दिया गया था. (bbc.com/hindi)


