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इस्लामाबाद की एक अदालत ने इद्दत के दौरान शादी के मामले में इमरान खान और उनकी पत्नी को बरी कर दिया है.
फ़रवरी में इस्लामाबाद कोर्ट के वरिष्ठ सिविल जज क़ुदरतुल्लाह ने इस मामले में इमरान ख़ान और उनकी पत्नी को सात साल जेल की सजा सुनाई थी.
इस्लामाबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मुहम्मद अफ़ज़ल माजूका ने इद्दत मामले में सज़ा के ख़िलाफ़ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और बुशरा बीबी की अपील स्वीकार कर ली है. कोर्ट ने इमरान खान और बुशरा बीबी को इस मामले से रिहा करने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने अदियाला जेल अधिकारियों को समन जारी करते हुए लिखा कि अगर इमरान खान और बुशरा बीबी किसी अन्य मामले में लिप्त नहीं हैं तो उन्हें रिहा कर दिया जाए.
हालांकि कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद भी इमरान ख़ान की रिहाई नहीं हो पाएगी क्योंकि इन अपीलों पर फैसले से पहले ही लाहौर की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने 9 मई की घटनाओं में इमरान खान की अंतरिम जमानत खारिज कर दी थी. इसके बाद लाहौर पुलिस ने इन मामलों में इमरान ख़ान को गिरफ़्तार करने का फ़ैसला लिया.
यह तय है कि इन अपीलों की मंजूरी के बाद इमरान ख़ान की पत्नी को रिहा कर दिया जाएगा क्योंकि उनके ख़िलाफ़ कोई अन्य मामला नहीं है जिसमें उनकी गिरफ़्तारी की आवश्यकता हो.
क्या है इद्दत?
मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक़ इद्दत वह अवधि होती है, जब एक पत्नी अपने पति की मौत या तलाक़ के बाद बिताती है.
ये अवधि तीन महीने की होती है लेकिन स्थिति के अनुसार, इसमें बदलाव भी किया जा सकता है. इस अवधि के बाद महिला दूसरी शादी कर सकती है. (bbc.com/hindi)


