अंतरराष्ट्रीय
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के अभियोजक का कहना है कि उनका कार्यालय युद्ध और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के लिए इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री योआव गैलेंट का गिरफ़्तारी वारंट मांग रहा है.
अभियोजक का आरोप है कि ग़ज़ा युद्ध में इसराइल ने 'भूख' को नागरिकों के ख़िलाफ़ हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया है और उनके पास इसके पुख्ता सबूत हैं.
अभियोजक ने हमास के तीन नेताओं के ख़िलाफ़ भी 7 अक्तूबर को इसराइल पर हुए हमले के संबंध में युद्ध अपराधों और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के लिए गिरफ़्तारी वारंट मांगा है.
अभियोजक का कहना है कि ये निर्णय स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का नतीजा है. अब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के जज ये तय करेंगे कि गिरफ़्तारी वारंट जारी किया जाए या नहीं.
वहीं, इसराइल में विपक्ष के नेता ने नेतन्याहू और गैलेंट के गिरफ़्तारी वारंट को इसराइल के लिए नैतिक और राजनीतिक त्रासदी कहा है.
याइर लैपिड ने कहा है कि उनका देश अपने नेताओं और हमास के नेताओं के बीच तुलना को स्वीकार नहीं करेगा.
वहीं, नेतन्याहू ने इससे पहले कहा था कि अगर ऐसा निर्णय लिया जाता है तो यह यहूदी विरोधी नफ़रत भरा अपराध होगा.
वहीं, हमास के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रायटर्स से कहा है कि आईसीसी के अभियोजक का हमास के नेताओं का गिरफ़्तारी वारंट मांगना पीड़ित और जल्लाद को एक बराबर रखना है.
हमास अधिकारी ने कहा कि इससे इसराइल को ‘फ़लस्तीनियों के ख़ात्मे के इस युद्ध’ को जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. (bbc.com/hindi)


