गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा-राजिम, 19 मई। वृंदावन धाम से पधारे पंडित नवल कृष्ण शास्त्री महाराज ने कथा के दूसरे दिन शिव पार्वती विवाह प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा की एक समय दक्ष प्रजापति एक विशाल यज्ञ का आयोजन करते हैं, सभी देवी देवताओं को निमंत्रण भेजते हैं किंतु शिव जी को यज्ञ में निमंत्रण नहीं भेजा। और शिव जी को यज्ञ का भाग नहीं दिया।
देवता गंधर्व विमान में बैठकर कैलाश के ऊपर से जा रहे थे सती जी देव कन्याओं को सुंदर-सुंदर सिंगर किया देखकर हाथ उठाकर के बुलाया और पूछा तुम लोग कहां जा रही हो उत्तर मिला आपको पता नहीं आपके पिता बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं हम सबको निमंत्रण मिला है क्या आपको निमंत्रण नहीं मिला सती जी को आशीर्वाद की पिताजी यज्ञ कर रहे हैं और मुझे सूचना भी नहीं थी देव कन्याएं कैलाश से विद्यालय विदा ली शिवाजी जब ध्यान से उठे तो सती ने उनसे पूछा मेरे पिताजी यज्ञ कर रहे हैं क्या आपके पास कोई निमंत्रण लेकर कोई आया था शिवजी ने कहा नहीं देवी कोई नहीं आया फिर भी सती जी जाने का आग्रह करने लगी शिव जी ने सती को समझाया यह देवी तुम वहां मत जाओ यज्ञ तो केवल एक बहाना है केवल एक निमित्त है मेरा अपमान करना शिवाजी सती को समझते हैं किंतु सती नहीं समझती और पिताजी के घर पीहर प्रेम के कारण जाने का हिस्सा किया शिवजी ने नंदी को ही सहारा किया नंदी दौड़ते हुए माताजी के पास गए । कहा मां मेरे ऊपर विराजो पैदल चलकर जाना ठीक नहीं है ।
सती जी नदी पर विराज गई श्रृंगी श्रृंगी साथ में चले शिवजी जानते थे की सती अब वापस नहीं आयेगी। शिवजी की स्तुति की प्रसन्न होकर शिवजी दक्ष प्रजापति को जीवित की यज्ञ पूर्ण हुआ हरिद्वार के पास कनखल जहां है वहां दक्ष प्रजापति ने यह यज्ञ किया था,सती जी हिमालय में पार्वती रूप से प्रकट हुई देवताओं ने शिवजी से विवाह करने का आग्रह किया शिवाजी समाधि में स्थित थे समाधि को भंग करने के लिए देवताओं ने कामदेव को भेजो शिव जी ने कामदेव को जला दिया अर्थात विवाह से पूर्वी कामदेव को जला डाला तत्पश्चात महाराज जी ने शिव पार्वती विवाह का बहुत ही रोचक प्रस्तुति दी आयोजकों द्वारा शिव पार्वती विवाह की झांकी दिखाई गई।
इस अवसर पर सिंध पंचायत भवन में श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी जिसमें प्रमुख रूप से मोहनलाल धामेजानी,राजेश धामेजानी,सुनील धामेजानी, कीर्ति धामेजानी, मोहनलाल धामेजानी, सुनील,सोनी धामेजानी, गोविंद राजपाल,दीपेश,प्रवेश राजपाल, किशन राजपाल,शंकर राजपाल,डॉ रमाकांत महाराज,प्रीतम चंद छाबड़ा, ललित प्रसाद पांडेय,नारायण भाई, अशोक,राजू काबरा,आर.वर्मा, डां वर्मा पशु चिकित्सक,पुनीत राम जांगड़े, पुरुषोत्तम कंसारी,सम्मन लाल रजक,प्रदीप इसरानी,नाथू कंसारी, योगेंद्र गोपी सोनकर,कविता इसरानी,ज्ञानचंद इसरानी एवं परिवार जो आज के मनोरथी भी थे,श्याम किशोर गुप्ता, सनत शर्मा एवं सैकड़ो की संख्या में माताएं उपस्थित थीं।


