गरियाबंद

भानसिंह ने बारहमासी गीत से संजोई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
06-Feb-2026 7:07 PM
भानसिंह ने बारहमासी गीत से संजोई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

राजिम, 6 फरवरी। राजिम कुंभ कल्प मेला के स्थानीय सांस्कृतिक मंच पर पांचवें दिन गुरुवार 5 फरवरी को लोकनृत्य, लोकगीत और लोकविधाओं की प्रस्तुतियां प्रवाहित होती रही। सुबह 11.30 से शाम 5 बजे तक सैकड़ों लोक कलाकारों ने अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मगरलोड के सोनवाड़ा गांव से आए भानसिंह ध्रुव ने लोककला मंच पर बारहमासी गीत और नृत्य की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को जीवंत रूप में उकेर दिया। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके साथ ही उन्होंने  ‘राम आएंगे’ भजन प्रस्तुत किया, जिस पर भावपक्ष के कलाकारों ने भगवान रामचंद्र के दर्शन का सजीव चित्र मंच पर प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान गंगोरीपार की राम्हिन बाई ठाकुर ने आदिवासी नृत्य, लाफिन के होमन यादव ने राउत नाचा, आरंग की प्रियांशी तिवारी ने सुवा नृत्य, बरभाठा (महासमुंद) के शिवा सुरदास ने सुगम गायन, गरियाबंद के प्रेम यादव ने आदिवासी नृत्य तथा मरौद के लोकेश्वर साहू ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया। इसी क्रम में नवागांव के खेलावन सिन्हा, फूलझर की गायत्री राजपूत ने पंडवानी, नवापारा के हरिशंकर साहनी ने जगराता के माध्यम से देवी भजनों का भावपूर्ण आगाज किया।

पुराने महोत्सव स्थल नदी मंच पर खमतरई की ललिता साहू ने मानस गान के अंतर्गत धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी।

वहीं भैंसातरा के कपिल साहू ने रामायण, मगरलोड की भुवनेश्वरी ने भजन, बहरापाल के नकुल राम साहू तथा बेलटुकरी के देवलाल साहू ने जस झांकी प्रस्तुत कर समां बांध दिया। कार्यक्रम का संचालन निरंजन साहू, मनोज सेन, दुर्गेश तिवारी और किशोर निर्मलकर ने किया। कार्यक्रम प्रभारी पुरुषोत्तम चंद्राकर सहित अधिकारी-कर्मचारी आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।


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