गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 12 जनवरी। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानि जी-राम-जी योजना को लेकर कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों द्वारा किए जा रहे विरोध पर निशाना साधते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के अध्यक्ष चंदूलाल साहू ने कहा कि विरोध करने वाले कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां ये कह रही हैं कि मोदी सरकार ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) को इसलिए बंद कर दिया क्योंकि उसमें महात्मा गांधी का नाम शामिल है और भाजपा व मोदी सरकार को महात्मा गांधी और उनके नाम से नफरत है।
ऐसा निम्नस्तरीय आरोप लगाकर ये पार्टियां देश की जनता को भाजपा व मोदी सरकार के विरुद्ध भडक़ाने का प्रयास कर रही हैं।जबकि हकीकत यह है कि भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके मनरेगा के स्थान लाए जा रहे विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना के संक्षिप्त रूप यानि जी-राम-जी में राम शब्द आ जाने से कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों को दिक्कत हो रही है क्योंकि इन पार्टियों को भगवान राम और उनके नाम तक से नफरत है। कांग्रेस तो सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार चुकी है। इसी प्रकार विपक्षी पार्टियों को अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने से आज तक दिक्कत है।इसके अलावा जी-राम-जी योजना को स्वीकार करने से इन पार्टियों को अपने विशेष वोट बैंक के नाराज होने का भय बना हुआ है।
श्री साहू ने कहा कि विरोध करने के चक्कर में ये पार्टियां अपनी सुध-बुध खो चुकी हैं, जिसके चलते ये पार्टियां कह रही हैं कि मनरेगा बंद कर,जी-राम-जी योजना लाकर मोदी सरकार ने लोगों का रोजगार छीन लिया है । जबकि हकीकत यह है कि मनरेगा में लोगों को साल में 100 दिन रोजगार मिलता था,जबकि जी-राम-जी योजना में साल में 125 दिन रोजगार मिलेगा । यानि लोगों को 25 दिन ज्यादा काम यानि रोजगार मिलेगा और उतना ही अधिक भुगतान मिलेगा,जिसका सीधा मतलब है कि लोगों की आर्थिक स्थितिभुगतात होगी।
हकीकत में यही बात कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों को चुभ रही है क्योंकि ये पार्टियां लोगों को गरीब बनाकर ही रखना चाहती हैं,जिससे उनकी गरीबी का फायदा उठाकर,पैसे का प्रलोभन देकर अपने पक्ष में नारे लगाने और मतदान करने पर मजबूर कर सकें क्योंकि इन पार्टियों की खुद की कारस्तानी के चलते आज देशवासियों में उनकी विश्वसनीयता इस कदर घट चुकी है कि उन्हें देशवासियों से न तो वोट मिल रहा है और न नोट चंदा। लोगों को अपने स्वार्थ के लिए गरीब बनाए रखने की यही वजह से ही आजादी के लगभग 60 साल तक राज करने के बावजूद कांग्रेस और उनके सहयोगी दल देशवासियों की गरीबी दूर नहीं कर सके।मनरेगा शुरू भी किया तो उसमें भी लोगों को केवल गड्ढा खोदने और भरने तक सीमित रखा, जिससे वे और कोई काम में माहिर होकर गरीबी से बाहर न निकल पाएं।
जबकि दूसरी ओर मोदी सरकार ने जी-राम-जी योजना में जल सुरक्षा कार्य,मुख्य ग्रामीण संरचना,आजीविका आधारित परिसंपत्तियां और जलवायु अनुकूल काम को शामिल किया है,इससे पता चलता है कि रोजगार के साथ-साथ जनोपयोगी और कौशल विकास के कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है।
इतना ही नहीं इस योजना में काम ग्राम सभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से प्रस्तावित होंगे यानि ग्राम सभा और पंचायतों को सशक्त बनाया जा रहा है । इस योजना में समय पर भुगतान को अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत कम से कम 7 दिन और अधिक से अधिक 15 दिन के भीतर भुगतान लोगों को मिल जाएगा,ऐसा न होने पर लोगों को मुआवजा भी दिया जाएगा।श्री साहू ने कहा कि जी-राम-जी योजना सभी तरीकों से लोगों के हित से संबद्ध है और इस योजना से लोगों के बीच मोदी सरकार की छवि और मजबूत होगी,जबकि कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों की छवि रसातल में चली जाएगी।इन सबका सार यही है कि कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां केवल अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने, देशवासियों को अपने निज स्वार्थ के लिए गरीब ही बनाए रखने,विशेष वोट बैंक को खुश करने और भगवान श्रीराम व उनके नाम से नफरत के चलते जी-राम-जी योजना का विरोध कर रही हैं, लेकिन ऐसा कर वे सभी अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं।


