गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा-राजिम, 3 जनवरी। नवापारा शहर में शुक्रवार की रात एक बार फिर दैत्याकार हाईवा का कहर देखने को मिला। रेत से लोड तेज रफ्तार हाईवा अचानक अनियंत्रित होकर सडक़ पर खतरनाक तरीके से हवा में लहराने लगी। इस दौरान सडक़ पर अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर इधर-उधर भागते नजर आए। गनीमत रही कि हाईवा किसी राहगीर को चपेट में नहीं ले सका, जिससे कई लोगों की जान बाल-बाल बच गई।
हालांकि हादसे के दौरान सडक़ किनारे स्थित नगर पालिका कॉप्लेक्स, फर्नीचर और अन्य दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा। दुकानों में रखा सामान क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाईवा के सामने का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वाहन कितनी तेज रफ्तार में था, जबकि चालक नशे में इतना धुत था और केबिन में ही बेहोश जैसे हो गया। घटना के बाद मौके पर बड़ी संख्या में नगरवासी जमा हो गए। प्रतिबंधित समय में रेत से भरी हाईवा के शहर के भीतर चलने से नाराज लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने चालक की जमकर पिटाई कर दी और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी लगाना शुरू कर दिया। घटना सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन चालक को भीड़ से निकालने के दौरान पुलिस और आक्रोशित नगरवासियों के बीच झूमाझटकी की स्थिति बन गई। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने हालात को नियंत्रित किया और हाईवा चालक को गिरफ्तार कर थाने ले गई।
प्रतिबंधित समय में
चल रही रेत गाडिय़ां
गौरतलब है कि नवापारा शहर में सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक रेत गाडिय़ों और भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर शहर के भीतर भारी वाहन चलाए जा रहे हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। लोगों ने बताया कि हाइवा रात करीब 9 बजे शहर के भीतर प्रवेश किया था और चालक काफी नशे में धुत था। गाड़ी रूकने के बाद चालक केबिन में ही धुत पड़ा रहा। घटना के बाद गुस्साए नगरवासियों ने प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित समय में शहर के भीतर रेत से भरी भारी गाडिय़ों का आवागमन बिना प्रशासनिक मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है। आरोप लगाया गया कि जिम्मेदार अधिकारी अवैध रूप से पैसा लेकर इन वाहनों को शहर में प्रवेश की अनुमति दे रहे हैं, जिससे आम जनता की जान खतरे में पड़ रही है।
प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाई जाए
इस घटना के बाद एक बार फिर प्रशासन और परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रतिबंधित समय में भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती से रोक लगाई जाए और नियम तोडऩे वालों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।


