गरियाबंद
प्रधानमंत्री जनमन आदिवासी योजना का हाल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम/छुरा, 26 नवंबर। गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड में प्रधानमंत्री जनमन आदिवासी योजना के तहत सबसे पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए प्रस्तावित आंगनबाड़ी भवन का लेआउट कागजों में तैयार हो चुका है, लेकिन जमीन पर निर्माण की शुरुआत आज तक नहीं हो सकी।
स्थिति यह है कि जो आंगनबाड़ी सुविधा बच्चों के लिए बनाई जानी थी, वह अब अस्तबल जैसे जर्जर ढांचे में तब्दील हो चुकी है। वहीं आश्रित ग्राम कोकड़ाछेड़ा (हिराबत्तर) के बच्चों का बचपन सरकारी स्कूल की दीवारों के सहारे पल रहे हैं।
स्थानीय अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि स्कूल के दो कमरों में आधे हिस्से पर आंगनबाड़ी चलाई जा रही है और आधे में स्कूल की कक्षाएं।
एक शिक्षक के अनुसार, एक ही कमरे में पांच क्लास चलाना बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों के लिए चुनौती बन चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित भवन केवल फाइलों में दर्ज है। जमीन पर न नींव दिखाई देती है, न एक भी ईंट।
सेक्टर पर्यवेक्षक कौशल वर्मा ने स्वीकार किया कि निर्माण प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा गया था और दस्तावेजी रूप से पारित भी दिखता है, मगर कार्य शुरू नहीं हुआ।
इस संबंध में जिला गरियाबंद के सहायक आयुक्त (निर्माण शाखा) ने बताया कि निर्माण कार्य का टेंडर शांति ट्रेडर्स नामक संस्था को दिया गया है, किंतु किसी भी प्रकार की प्रगति रिपोर्ट आज तक प्रस्तुत नहीं की गई।


