संपादकीय

‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : केजरीवाल से जला, शक से भरा देश अब कॉकरोच भी फूंक-फूंककर खा रहा है..
सुनील कुमार ने लिखा है
05-Jun-2026 3:56 PM
‘छत्तीसगढ़’ का  संपादकीय : केजरीवाल से जला, शक से भरा देश अब कॉकरोच भी फूंक-फूंककर खा रहा है..

भारत के इम्तिहानों की नाकामयाबी पर एक तंज की तरह ट्विटर पर शुरू कॉकरोच जनता पार्टी को अमरीका में पढ़ रहे एक भारतवंशी छात्र अभिजीत दीपके ने बनाया था, और वह ऑनलाईन सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स पर उतरते-चढ़ते कभी कहीं पर ब्लॉक होते, तो कभी कहीं पर मशहूर होते अब सडक़ पर आ रही है। कल 6 जून को अभिजीत के दिल्ली पहुंचने पर इसका पहला आयोजन जंतर-मंतर पर एक शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की शक्ल में करने की घोषणा हुई है। नीट पेपर लीक और सीबीएसई इम्तिहानों की गड़बडिय़ों को लेकर केन्द्रीय शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफे की मांग कल का मुख्य मुद्दा घोषित किया गया है। दो दिन पहले ही पार्टी ने अपने तीन राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किए हैं, जिनके बारे में सोशल मीडिया पर दूसरे लोग जीवविज्ञान की प्रयोगशाला में मेंढक के किए जाने वाले डिसेक्शन की तरह चीर-फाड़ कर रहे हैं। अब भारत में बहुत सारे तबके जो कि अब तक मोदी समर्थक, और मोदीविरोधी जैसे एकदम साफ-साफ बंटे हुए खेमों में बंटे हुए थे, वे एकदम से दुविधा में आ गए हैं कि कॉकरोच का डिसेक्शन कैसे किया जाए?

दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी अगर इतनी शोहरत नहीं पाती, सोशल मीडिया पर उसके हफ्ते भर में करोड़ों फॉलोअर नहीं हो जाते, तो सब लोग अपने-अपने खेमों के तम्बुओं में चैन से बैठे सोशल मीडिया पर जुगाली करते रहते। लेकिन कॉकरोच अचानक खाने में आ जाने से, लोगों को अब समझ नहीं पड़ रहा है कि इसे खाएं कैसे, इसके बाद जुगाली कैसे करें, या इसे बिना खाए छोड़ दें? हिन्दुस्तान के लोग अलग-अलग विचारधाराओं, नेताओं, और राजनीतिक दलों के तजुर्बों से थके हुए भी हैं, और गरिष्ठ हिन्दी में कहें तो दिग्भ्रमित भी हैं। हाल के दशकों में इस देश ने अरविंद केजरीवाल एंड गैंग को जिस तरह से देखा था, उससे देश में तरह-तरह की राजनीतिक साजिश आईआईटी से निकले उस नौजवान तिलचट्टे को लेकर बाद में लोगों के बीच चर्चित हुई। ऐसी अपराधकथाओं के कोई सुबूत तो होते नहीं हैं, लेकिन कई लोगों का अब यह निष्कर्ष है कि केजरीवाल, अन्ना हजारे, रामदेव, रविशंकर, जस्टिस हेगड़े, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव जैसे दर्जन भर से अधिक चर्चित लोग भारत में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नाम पर एकजुट हुए थे, लेकिन बाद में समझ पड़ा कि इनका अकेला मकसद उस समय की यूपीए सरकार पर भ्रष्टाचार के तात्कालिक आरोपों का झंडा फहराना था, और देश में अविश्वास की एक ऐसी हवा खड़ी करनी थी जो कि 2014 के आम चुनावों को प्रभावित कर सके। इस गैरराजनीतिक कहे जा रहे आंदोलन के कई साथी बाद में मोहभंग से अलग होते चले गए, और इन सबने सार्वजनिक रूप से यह कहा कि केजरीवाल ने उन्हें इस्तेमाल कर लिया। लोगों को याद भी होगा कि सीएजी की एक कल्पना-आधारित रिपोर्ट को लेकर, जनलोकपाल नाम की एक रामबाणी कल्पना सामने रखकर इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम का यह आंदोलन आम आदमी पार्टी की सरकारों में तब्दील हुआ, और बाद के राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना था कि यह कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने के लिए भाजपा का ही खड़ा किया हुआ एक मोर्चा था। इस तरह की राजनीति के कोई सुबूत नहीं रहते, इसलिए हम अलग-अलग लोगों के विश्लेषण ही यहां रख रहे हैं।

अब जब कॉकरोच जनता पार्टी कल जमीन पर उतर रही है, उसी तरह दिल्ली में एक मंत्री के इस्तीफे की मांग लेकर सार्वजनिक आंदोलन करने जा रही है, अपने को गैरराजनीतिक करार दे रही है, तब केजरीवाल के आंदोलन की याद आना स्वाभाविक है। केजरीवाल भी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक धूमकेतू की तरह आए थे, और परंपरागत राजनीतिक पार्टियों से थकी हुई जनता ने उन्हें ईमानदारी और नैतिकता के मसीहा की तरह सिर पर बिठाया था, यह अलग बात है कि उनका अंत सरकारी सादगी की अपनी घोषणाओं को कुचलते हुए दिल्ली में अपने लिए शीशमहल बनवाने तक चले गया था, और अगर भाजपा ने उन्हें खड़ा किया था, तो केन्द्र की भाजपा सरकार की सीबीआई ने ही उन्हें उसी तरह सत्ता से हटा दिया, जिस तरह केजरीवाल एंड गैंग ने 2014 में यूपीए को सरकार से हटा दिया था।

भारत में केजरीवाल से जले हुए लोग कॉकरोच को भी फूंक-फूंककर खा रहे हैं। इसमें कुछ अनहोनी बात नहीं है। सार्वजनिक जीवन के तजुर्बे आने वाले लोगों के लिए कई बार ऐसी ही दिक्कतें खड़ी करते हैं। भारत के कुछ राजनीतिक दल बड़ी सावधानी से कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध करने से बच रहे हैं, कुछ लोग इसे मोदी सरकार की ही एक योजना बता रहे हैं ताकि केन्द्र सरकार की बड़ी असफलताओं की तरफ से ध्यान हटाया जा सके, और केन्द्र के एक मंत्री तक ही उसे सीमित किया जा सके। अगर ऐसा है भी, तो इसमें कुछ अनहोनी बात नहीं है, क्योंकि दुनिया भर में सरकारें ऐसी स्पिन डॉक्टरी कही जाने वाली हरकतें करती हैं। अमरीका में जब एपस्टीन फाइलों के कंकाल व्हाइटहाऊस के बाहर सडक़ पर कुछ ज्यादा ही नाचने लगे, तो ट्रम्प ने इजराइल के झांसे में ईरान पर हमला कर दिया। इसके बाद जब ईरान ट्रम्प की जिंदगी की सबसे बड़ी शिकस्त बन गया, तो इसकी तरफ से ध्यान हटाने के लिए बीती आधी सदी से और पहले की भी उडऩतश्तरियों, और यूएफओ की फाइलें जारी कर दी गईं। अमरीका और दुनिया को ट्रम्प ने दर्जनों अलग-अलग चीजों में ऐसे उलझाया कि एपस्टीन का नाम ही खबरों से गायब हो गया।

लेकिन हम कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर अपने संदेहों को किनारे रखकर यह देखना चाहेंगे कि यह क्या करती है? लोकतंत्र में अगर कोई नेता, संगठन, या कोई गैरराजनीतिक पार्टी किसी एक भ्रष्टाचार का भी विरोध करते हैं, तो उसमें कोई बुराई नहीं है। केजरीवाल नाम के तजुर्बे की वजह से भारत के लोकतंत्र में सदियों तक किसी और प्रयोग को नाजायज मान लिया जाए, यह तर्क हमारे गले नहीं उतरता। भाजपा ही क्यों, देश की हर पार्टी, और हर नेता को ऐसे संगठन या आंदोलन खड़े करने का पूरा हक है, जो कोई कानून नहीं तोड़ते। आज भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से जुड़े हुए दर्जनों ऐसे संगठन रहते हैं, जो कि उस पार्टी की रणनीति के प्यादे या सेनापति रहते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी आज भाजपा की उपज है, या देश के निराश और बेचैन नौजवानों, और किशोरों की भड़ास निकलने का एक जरिया है, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल इस आंदोलन को शुरू करने वाले एक भारतवंशी, अमरीका में बसे छात्र को हाल के बरसों की इस देश की सबसे अधिक खुर्दबीनी जांच से गुजरना पड़ रहा है, और उसमें भी कोई बुराई नहीं है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन कैसे खोखले, भ्रष्ट, और चुनिंदा निशानों पर हमले करने वाले रहते हैं, यह देश ने केजरीवाल की शक्ल में अच्छी तरह देखा हुआ है। वे भी गैरराजनीतिक कहे जाने वाले आंदोलन के केन्द्रीय व्यक्ति थे, और आज का अभिजीत दीपके भी उसी किस्म का अकेला व्यक्ति है। फिलहाल आज की इस बात को हम मोदी सरकार के एक सबसे बड़े और मुखर आलोचक, फिल्म अभिनेता प्रकाश राज के बयान पर खत्म करना चाहते हैं, उन्होंने कहा है- मैं 6 तारीख को वहां पहुंचने की कोशिश कर रहा हूं, ताकि सबसे प्रासंगिक कॉकरोच आंदोलन के प्रति एकजुटता दिखा सकूं। मैं अभी एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में काफी दूर हूं, फिर भी वहां पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहा हूं। सभी युवा कॉकरोचों से मेरा आग्रह है कि वे रेंगते हुए वहां पहुंचें।

देश के जो मुखर लोग मोदीविरोधी होने की वजह से प्रकाश राज सुहाते थे, आज वे असमंजस में हैं कि वे भी कॉकरोच बन गए हैं, ऐसे में किसका भरोसा किया जाए, और कॉकरोच को क्या माना जाए, देशप्रेमी, देश का गद्दार, या भाजपा का औजार?

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