संपादकीय
भारत में शायद ही किसी शहर का एक दिन बिना किसी साइबर क्राइम के निकलता होगा, और औसत तो शायद लाखों साइबर क्राइम हर दिन होते हैं, जिनमें से हो सकता है कि आधे या चौथाई ही पुलिस तक पहुंचते हों। हिन्दुस्तान के लोग तरह-तरह की दर्जनभर तरकीबों से लूटे जा रहे हैं, लेकिन आज इस मुद्दे पर लिखने का एक दूसरा ही मकसद है कि अब भारत के साइबर लुटेरे अमरीका और योरप के लोगों को भारत से फोन करके न सिर्फ ठग रहे हैं, बल्कि उन्हें डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर, अपने आपको अमरीकी या यूरोपीय जांच एजेंसी का अफसर बताकर उनसे उगाही कर रहे हैं। उनसे अलग-अलग खातों में पैसा लेते हैं, और फिर उसे कई रास्तों से घुमाकर भारत ले आते हैं। अभी भारत में ईडी ने कुछ कॉल सेंटरों पर छापे मारे, तो पता लगा कि हिन्दुस्तानियों को पश्चिमी अंदाज में अंग्रेजी बोलना सिखाकर उन्हें कई अलग-अलग तरकीबों से पश्चिमी देशों के लोगों को लूटने में लगाया गया है। यह पूरी तरह से अहिंसक अपराध भारत में तो बहुत ही लोकप्रिय है, और अब भारत से यह अमरीका और योरप के देशों में भी पहुंच चुका है। दिलचस्प बात यह भी है कि ट्रम्प का 50 फीसदी टैरिफ इस भारतीय सेवा पर नहीं लग रहा है, बल्कि भारत का जितना आर्थिक नुकसान अमरीकी राष्ट्रपति से हो रहा है उसे भारत के ठग कुछ हद तक वापिस ला रहे हैं, यह अलग बात है कि यह पैसा सरकार या जनता के काम नहीं आ रहा है, जुर्म के हाथ मजबूत कर रहा है।
पश्चिम के देशों के कामकाज के घंटों में भारत के कॉल सेंटरों से कई तरह की सेवाएं दी जाती हैं। यहां महानगरों, और उपमहानगरों में अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का बड़ा कारोबार है जिनमें काम करने के लिए युवक-युवतियां उन देशों के अंदाज में अंग्रेजी बोलना सीखे हुए रहते हैं, और वहां की कंपनियों के लिए यहां पर सस्ते में काम करते हैं। अभी जो साइबर मुजरिम भारत में पकड़ाए हैं, उनमें पुणे का एक ऐसा कॉल सेंटर है जो कि वहां पर गुजरात के अहमदाबाद के दो लोग चला रहे हैं, और पुलिस ने यहां 32 लोगों को गिरफ्तार किया है जो कि अमरीकियों के कम्प्यूटरों, और मोबाइल पर भारत में बैठे हुए तरह-तरह के खुफिया-घुसपैठिया सॉफ्टवेयर डाल देते हैं, और फिर उनके सिस्टम को धीमा कर देते हैं। इसके बाद वे अपने आपको माइक्रोसॉफ्ट या एप्पल जैसी टेक कंपनी का प्रतिनिधि बताकर उन्हें फोन करते हैं, और उनसे सिस्टम ठीक करने के नाम पर भुगतान लेते हैं। ऐसे भुगतान के साथ-साथ वे उन्हें डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी भी देते हैं, और उनसे लगातार उगाही करते हैं। इस छापे में पुलिस को बड़ी संख्या में लैपटॉप और मोबाइल के साथ-साथ फंसाने, ठगने, और धमकाने की स्क्रिप्ट भी लिखी हुई मिली है।
आज कुछ अफ्रीकी देशों में बैठे हुए लोग अमरीका और ब्रिटेन के किशोर-किशोरियों को मोबाइल के जरिए सेक्स-वीडियो में फंसाते हैं, और उनका इतना सेक्सटॉर्शन करते हैं कि कई टीन-एजर खुदकुशी कर रहे हैं। भारत में भी साइबर-जुर्म में नाइजीरिया के कई लोग पकड़ाए हैं। भारत के भीतर भी धमकाने, ठगने, मोबाइल के जरिए बैंक खातों पर कब्जा करने, और उन्हें खाली कर देने के जुर्म रोज की बात हो गए हैं। एक वक्त था कि लुटेरों को चेहरे पर कपड़ा बांधकर, चाकू-पिस्तौल लेकर लूटना पड़ता था, लेकिन अब बिल्कुल अहिंसक तरीके से घर बैठे मोबाइल फोन, या ऑनलाईन पर और अधिक बड़ा काम हो जाता है, रकम लेकर या गहने लूटकर फरार भी नहीं होना पड़ता, मेहनत से लूटे गए सामान वापिस जाने का खतरा भी नहीं रहता, क्योंकि आज के साइबर-मुजरिम जालसाजी, ठगी, और लूट से हासिल रकम को तेजी से बाहर निकाल देने का इंतजाम पहले से रखते हैं।
अभी भारत में बैठे अमरीका और योरप में लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने वाले लोग बाजार में एक्सपोर्ट-क्वालिटी का माल लेकर आए हैं, और इस पर कोई टैरिफ भी नहीं है, कोई एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट ड्यूटी भी नहीं लगती है, और विदेशी मुद्रा तो अब क्रिप्टोकरेंसी की शक्ल में हाथ बदलती है, और आखिर में जाकर हाथ को हाथ नहीं सूझता। दिलचस्प बात यह है कि भारत से पश्चिम के देशों में किए जा रहे इस जुर्म की जानकारी की खबर तो भारत से ही निकलकर आई है। भारतीय एजेंसियों ने यह जुर्म पकड़ा है, और इस देश को यह फिक्र करने की भी जरूरत है कि ऐसे संगठित अपराध के चलते हुए भारत में कॉल सेंटरों का कारोबार कितना प्रभावित होगा? आज पश्चिमी कंपनियां भारतीय कॉल सेंटरों में अपने वहां के ग्राहकों की शिकायतें दर्ज करवाती हैं, या तरह-तरह के दूसरे काम की जानकारी भारत में बैठे नोट की जाती है। अब अगर ऐसी जानकारी को लेकर भारत से कुछ अपराधी कॉल सेंटर अमरीकी लोगों को लूटने के काम में लग जाएंगे, तो भारत में इस रोजगार की साख चौपट हो जाएगी। भारत वैसे भी आज अमरीकी राष्ट्रपति की बददिमागी की वजह से कई तरह के कारोबार खो बैठा है, और अब यह जानकारी बड़े पैमाने पर सामने आएगी, तो हो सकता है ट्रम्प इसे लेकर भारत पर टैरिफ और बढ़ा दे।
किसी देश को विश्वसनीयता की अपनी साख बरकरार रखने पर मेहनत करनी चाहिए। अब गुजरात के लोग महाराष्ट्र में कॉल सेंटर खोलकर देश भर के लोगों को नौकरी पर रखकर पश्चिमी अंदाज में अंग्रेजी में धमकी देकर अगर अंग्रेज और अमरीकी लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लूट रहे हैं, तो इससे भारत की साख बहुत बुरी तरह खराब होगी। देश के लोग चाहे जामताड़ा में बैठकर, या देश की राजधानी से बैठे-बैठे देश भर के लोगों को लूटें, उस पर तो बाकी दुनिया की सोच पर असर नहीं पड़ता, लेकिन जब हिन्दुस्तानियों की शोहरत अंतरराष्ट्रीय मुजरिमों की हो जाएगी, तो हम अभी देख ही रहे हैं कि ट्रम्प किस तरह हिन्दुस्तानी कामगारों के वीजा की गिनती घटा रहा है, उस पर अभूतपूर्व टैक्स लगा रहा है। भारत और उसके प्रदेशों की जांच एजेंसियों को इस अंतरराष्ट्रीय खतरे को भी समझना चाहिए। (क्लिक करें : सुनील कुमार के ब्लॉग का हॉट लिंक)


