दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 25 फरवरी। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करने वाला है। लगभग 1 लाख 72 हजार करोड़ के इस ऐतिहासिक बजट को संकल्प थीम के साथ प्रस्तुत किया गया है, जो संवेदनशील, जवाबदेह और दूरदर्शी सरकार की सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि हर वर्ग- किसान, युवा, महिला, विद्यार्थी, कर्मचारी और व्यापारी के सपनों को साकार करने का संकल्प है। विशेष रूप से दुर्ग जिले को अनेक महत्वपूर्ण सौगातें मिली हैं, जो शहर के शैक्षणिक, स्वास्थ्य और अधोसंरचनात्मक विकास को नई ऊंचाई देंगी।
उन्होंने कहा कि यह बजट दुर्ग सहित पूरे प्रदेश के संतुलित विकास का सशक्त रोडमैप है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना और महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस यह दर्शाता है कि राज्य सरकार एक संवेदनशील एवं जनहितैषी सरकार है, जो हर वर्ग के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह बजट ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को साकार करते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलन स्थापित करेगा तथा युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि योजनाओं के पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन से दुर्ग विकास की नई पहचान स्थापित करेगा और छत्तीसगढ़ प्रगति की नई ऊंचाइयों को स्पर्श करेगा।
बजट तरक्की के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा- ललित चंद्राकर
बजट को दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह बजट अमृत काल का बजट है, जो छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा देगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इस बजट में गरीब, किसान, महिला और युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि यह बजट छत्तीसगढ़ के हर तबके की तरक्की के लिए एक मजबूत नींव साबित होगा। विधायक ललित चंद्राकर ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी को इस बजट के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को केंद्रित करते हुए हमारी सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। इस बजट पर किसानों, गरीबों, युवाओं, मातृशक्ति और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी है।
आंकड़ों की बाजीगरी पर आधारित बजट- राकेश ठाकुर
जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बजट को दिशाहीन और आंकड़ों की बाजीगरी पर आधारित करार दिया उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की जनता—किसान, युवा, महिला, कर्मचारी और मध्यमवर्ग की वास्तविक अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।
बजट में बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत देने वाली कोई ठोस और स्पष्ट योजना दिखाई नहीं देती। किसानों के संदर्भ में सरकार ने धान खरीदी, समर्थन मूल्य, बोनस और सिंचाई विस्तार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट एवं ठोस प्रावधान नहीं किए हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए बजट में प्रभावी रोडमैप का अभाव है। जो किसानों के साथ वादा खिलाफी है। वहीं लाखों बेरोजगार युवाओं को इस बजट से भारी निराशा हाथ लगी है। रिक्त सरकारी पदों को भरने के लिए कोई भी बड़ी भर्ती परीक्षा घोषित नहीं किया है। लगातार हड़ताल में बैठे डीएड अभ्यर्थी, रसोईया के लिए भी इस बजट में कोई राहत नही है ग्रामीण अंचलों में स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अस्पतालों में डॉक्टरों के रिक्त पदों की समस्या गंभीर है, लेकिन बजट में इन समस्याओं के स्थायी समाधान की स्पष्ट योजना का अभाव है।
सरकार का तीसरा बजट जन आकांक्षाओं से दूर- धीरज बाकलीवाल
राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (शहर) के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने इसे जन आकांक्षाओं से दूर और दिशाहीन बजट बताया है। उन्होंने कहा कि बजट में बड़े-बड़े आंकड़े और आकर्षक शब्दों का प्रयोग किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए ठोस प्रावधान दिखाई नहीं देते। केवल योजनाओं के नाम गिनाने से विकास नहीं होता, बल्कि उसके लिए स्पष्ट नीति और बजटीय प्रतिबद्धता आवश्यक होती है।
बजट अविश्वसनीय व झूठ का पुलिंदा- देवेश मिश्रा
भारतीय गण वार्ता (भगवा) पार्टी छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष देवेश मिश्रा ने वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट को अविश्वसनीय व झूठ का पुलिंदा कहा है।
उन्होंने कहा कि क़ृषि क्षेत्र, शहरी विकास, औद्योगिक क्षेत्रों को लेकर जो धनराशि की घोषणा की गई है वे सभी मात्र बजट की खानापूर्ति ही है। देवेश मिश्रा ने कहा कि अब साय सरकार की सारी की सारी कार्यवाही कागजों और कार्यालय तक सीमित है, कोई भी कार्य धरातल पर नहीं नजर आता।
सरकार के आधे कार्यकाल बीत जाने पर भी कोई ठोस कार्यक्रम और जनसामान्य के अनुकूल नीतियों का अभाव, इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण जमीन खरीदी बिक्री, रियल एस्टेट जैसे अर्थव्यवस्था को बढ़ाने वाले क्षेत्रों में सरकार की नीतियाँ असफल साबित हुई है, इनके लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है।


