दन्तेवाड़ा

बैठकों का दौर बना परेशानी
12-Jun-2026 4:40 PM
बैठकों का दौर बना परेशानी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दंतेवाड़ा, 12 जून।
ईंधन संकट के अभूतपूर्व दौर में आए दिन शिक्षा विभाग की ओर से बैठक आयोजित किए जाने से संकुल समन्वयकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला में संकुल समन्वयकों की लगातार बैठक हो रही है। दस जून को  गीदम में बैठक के बाद दूसरे दिन जिला पंचायत में मीटिंग बुलाई गई। इस बात को लेकर समन्वयकों ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि मौजूदा तेल संकट के दौर में आए दिन ब्लॉक व जिला स्तर की मीटिंग रखना अनुचित है। शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ ही एमडीएम, निशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश वितरण आदि विभागीय योजना के सुचारू संचालन में संकुल समन्वयकों की महती भूमिका है। जिले के संकुल समन्वयक अपने मूल संस्था में अध्यापन का दायित्व निभाने के अलावा शालाओं का नियमित अवलोकन कर शिक्षा में गुणवत्ता लाने भरसक प्रयास कर रहे हैं। इन दिनों संकुल समन्वयकों पर जिम्मेदारी और काम का बोझ अधिक है।

समन्वयकों के मुताबिक रूटिन की मासिक बैठक के अलावा ब्लॉक व जिला स्तर पर आए दिन मीटिंग, वर्कशॉप और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। इस समय लगभग सभी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल- डीजल की मारा- मारी चल रही है। ऐसे में दूरस्थ इलाके में पदस्थ संकुल समन्वयकों को जिला स्तर की बैठक में शामिल होने के लिए  मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
 गीदम के संकुल समन्वयकों ने बताया कि 10 जून को ब्लॉक मुख्यालय गीदम में नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने से पूर्व स्कूल- छात्रावासों में आवश्यक व्यवस्था हेतु बैठक आयोजित किए गए थे। इसमें अपार आइडी, छात्रवृत्ति, पुस्तक - गणवेश वितरण, एमडीएम संचालन आदि कुल सत्रह बिंदु पर चर्चा की गई।  गुरुवार 11 जून को पुन: जिला पंचायत की बैठक में लगभग उसी एजेण्डा पर चर्चा के लिए बुलाया गया। लगातार संकुल समन्वयकों को ब्लॉक व जिला स्तर की बैठक में शामिल होने निर्देश जारी किए जाने पर परेशानी होने की बात कही जा रही है।
 

गीदम के संकुल समन्वयकों ने कहा है कि वर्तमान तेल संकट को देखते हुए प्रशासन को अनावश्यक बैठक आयोजित करने से बचना चाहिए। एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तेल संकट को देखते हुए वर्क फ्राम होम और वर्चुअल मीटिंग की बात कह रहे है, वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी आए दिन बैठक आयोजित कर पेट्रोल- डीजल के साथ ही समय की भी बर्बादी कर रहे हैं। पिछले दो दिनों से गीदम- बारसूर आदि शहरों में पेट्रोल- डीजल की किल्लत है। ऐसे हालात में लंबी दूरी तय कर मीटिंग में शामिल होने के लिए संकुल समन्वयक और शिक्षक कहाँ से तेल की व्यवस्था करेंगे। इस व्यवहारिक दिक्कत को भी तो  अधिकारियों को समझने की जरूरत है।


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