दन्तेवाड़ा

शक्ति दिवस पर्व: आदिवासी हल्बा संस्कृति और एकता का अनुपम संगम
29-Dec-2025 4:38 PM
शक्ति दिवस पर्व: आदिवासी हल्बा संस्कृति और एकता का अनुपम संगम

मां दंतेश्वरी की अर्जी विनती व समाज की पत्रिका का  विमोचन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बचेली, 29 दिसंबर।  बचेली नगर में अखिल भारतीय हल्बा,हल्बी आदिवासी समाज शाखा, बचेली के तत्वावधान में शक्ति दिवस पर्व 2025 का आयोजन 26 दिसंबर को सामाजिक भवन, बचेली में अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में किया गया। यह आयोजन आदिवासी समाज की एकता, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक चेतना को सशक्त करने का प्रतीक बना।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनएमडीसी बचेली परियोजना के उपमहाप्रबंधक सिविल एसआर डहरिया एवं विशिष्ट अतिथि मानव संसाधन विभाग के उपमहाप्रबंधक तिरूपति राव थे। साथ ही अध्यक्षता विघुत सहायक महाप्रबंधक प्रकाश ठाकुर ने की।  कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक ध्वजारोहण, मां दंतेश्वरी की अर्जी-विनती एवं समाज की पत्रिका के विमोचन के साथ की गई। इसके पश्चात आदिवासी परंपराओं से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। समाज के युवाओं और बच्चों के लिए खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें उत्साहपूर्वक सहभागिता देखने को मिली। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ प्रबंधक महेन्द्र कुमार ठाकुर उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज प्रमुख, गोंडवाना समाज, उरांव समाज, सतनाम समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। हल्बा,हल्बी समाज शाखा अध्यक्ष श्री सुरेश सहारे, कर्मचारी प्रकोष्ठ अध्यक्ष महेन्द्र कुमार ठाकुर, तथा समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता खोमन तारम, वेदप्रकाश कोठारी, पी.आर. कोलियारे, लक्ष्मीकांत भोयर, विकास ठाकुर, पितांबर सिंह देवहारी, सी.आर. ठाकुर, किशोर चनाप, परदेशी राम कोसमा, हुषन रावटे, दिलीप चिराम, रामेश्वर चिराम, दयालु राम, मुलचंद ठाकुर, ऋषि ठाकुर, नरेन्द्र रावटे सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।

 

महिला प्रभाग की ओर से अध्यक्ष श्रीमती चंद्रकला ठाकुर, सचिव ममता राना, कुलेश्वरी तारम, तरुणा भोयर, गेलमनी नाग, माधुरी ठाकुर, सीमा कोठारी, खोमेश्वरी सहारे, सरस्वती रावटे, गायत्री ठाकुर, केशरी चनाप, रीना ढाले, गायत्री चिराम सहित बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बनाया।

 कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने शक्ति दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आदिवासी हलबा हल्बी समाज की एकता, शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक विकास पर जोर दिया। संपूर्ण आयोजन सौहार्द, उत्साह और सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण बना।


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