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मुंबई, 13 जून। बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने बताया कि प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए एक नई विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर (बी)) जमा योजना (विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर (बी)) जमा योजना) का शुभारंभ किया है, जिसमें उच्च ब्याज दरों की पेशकश की जा रही है। यह योजना भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हाल ही में घोषित उपायों के अनुरूप शुरू की गई है। यह नई योजना 11 जून 2026 से प्रभावी होगी।
बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने बताया कि नई एफसीएनआर (बी) जमा योजना के तहत बैंक ऑफ़ बड़ौदा द्वारा प्रमुख विदेशी मुद्राओं, जैसे अमेरिकी डॉलर (यूएसडी), ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग (जीबीपी), यूरो, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (एयूडी) और कैनेडियन डॉलर (सीएडी) में 3 से 5 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाली जमाओं पर उच्च ब्याज दरों की पेशकश की जा रही है। ग्राहक अब अमेरिकी डॉलर जमा पर अधिकतम 6.00 प्रतिशत, ब्रिटिश पाउंड एवं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जमा पर 4.75 प्रतिशत, कैनेडियन डॉलर जमा पर 5.15 प्रतिशत तथा यूरो जमा पर 3.75 प्रतिशत तक ब्याज प्राप्त कर सकते हैं।
सुश्री बीना वाहिद, कार्यपालक निदेशक, बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा प्रवाह को प्रोत्साहित करने के लिए हाल में किए गए उपायों ने बैंकों द्वारा एनआरआई समुदाय के लिए पेश की जा रही अपनी एफसीएनआर (बी) को बेहतर बनाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। यह कदम एफसीएनआर (बी) जमाओं को आकर्षित करने और भारतीय रुपये को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक सुविचारित एवं बहुआयामी पहल है।
सुश्री वाहिद ने बताया कि बैंक ऑफ़ बड़ौदा की नई जमा योजना एनआरआई ग्राहकों को अपनी विदेशी मुद्रा जमाओं पर बेहतर प्रतिफल प्राप्त करने का आकर्षक अवसर प्रदान करती है। भारत के अंतर्राष्ट्रीय बैंक के रूप में, अनेक देशों में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति के साथ, बैंक इस अवसर का लाभ उठाने और एफसीएनआर (बी) अधिकतम जमा संग्रहण करने में पूरी तरह सक्षम है।
सुश्री वाहिद ने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह को प्रोत्साहित करने हेतु किए गए उपायों से देश के बाह्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने, विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होने तथा समग्र व्यापक आर्थिक स्थिरता में वृद्धि होने के आसार हैं। विशेष एफसीएनआर (बी) जमा योजना बैंक को प्रतिस्पर्धी लागत पर विदेशी मुद्रा संसाधन प्राप्त करने में भी सक्षम बनाएगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी।


