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सीनियर कंसल्टेंट डॉ. जैन, डॉ. अग्रवाल और डॉ. जायसवाल
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष
रायपुर, 31 मई। रामकृष्णा केयर अस्पताल, रायपुर ने बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर अस्पताल के विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन पर चिंता जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि अब 30 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी फेफड़ों की गंभीर बीमारियां और कैंसर तेजी से सामने आ रहे हैं। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तंबाकू और निकोटीन के आकर्षण का पर्दाफाश थीम रखी है।
अस्पताल ने बताया कि इसका उद्देश्य युवाओं को आकर्षित करने के लिए फ्लेवर्ड उत्पादों, ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच, आकर्षक पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसी रणनीतियों के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों के अनुसार मध्य भारत में धूम्रपान और बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का उपयोग अभी भी व्यापक है। भारत में करीब 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं और हर साल 13 लाख से अधिक मौतें तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं।
डॉ. रवि जायसवाल, सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया कि अधिकांश लोग मानते हैं कि धूम्रपान केवल फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है, जबकि सच्चाई इससे कहीं अधिक गंभीर है। सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक रसायन होते हैं, जिनमें कम से कम 69 कैंसर पैदा करने वाले तत्व हैं। तंबाकू का सीधा संबंध मुंह, गले, स्वरयंत्र, फेफड़े, भोजन नली, पेट, लिवर, अग्न्याशय, बड़ी आंत, किडनी, मूत्राशय, गर्भाशय ग्रीवा और कुछ रक्त कैंसर से भी है।
डॉ. सुशील जैन, सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट ने बताया कि आज बड़ी संख्या में युवा लगातार खांसी, सांस फूलना, फेफड़ों की क्षमता कम होना, अस्थमा और शुरुआती क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। लोगों को लगता है कि तंबाकू से नुकसान कई वर्षों बाद होता है, जबकि इसका असर बहुत पहले शुरू हो जाता है।
डॉ. गिरीश अग्रवाल, सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट ने बताया कि ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और फ्लेवर्ड वेपिंग डिवाइस को सुरक्षित विकल्प बताकर प्रचारित किया जाता है, लेकिन इनमें निकोटीन की लत, फेफड़ों में सूजन और लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बना रहता है।
अस्पताल ने बताया कि डॉक्टरों ने निष्क्रिय धूम्रपान के खतरों पर भी जोर दिया।


