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निकेश बरडिय़ा ने रोल ऑफ ज्वैलरी इन इंडियन कल्चर कार्यक्रम में रखे विचार
रायपुर, 30 मई। अनोपचंद तिलोकचंद ज्वैलर्स प्रा. लि. के निदेशक निकेश बरडिय़ा ने बताया कि टाइम्स कन्वर्सेशन ऑन रोल ऑफ ज्वैलरी इन इंडियन कल्चर कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए भारतीय संस्कृति में स्वर्ण एवं आभूषणों के महत्व, निवेश के बदलते स्वरूप तथा वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में सोने की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
श्री बरडिय़ा ने बताया कि भारत में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और पारिवारिक सुरक्षा का प्रतीक है। सदियों से भारतीय परिवारों में सोना सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक आस्था तथा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में जन्म से लेकर विवाह और विभिन्न धार्मिक अवसरों तक स्वर्ण का विशेष महत्व बना हुआ है।
श्री बरडिय़ा ने अपने बचपन की एक प्रेरणादायक स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि कंपनी के चेयरमैन तिलोकचंद बरडिय़ा अक्सर कहा करते हैं कि, सोने को अपने तीसरे बेटे की तरह समझना चाहिए। जिस प्रकार लोग अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत और निवेश करते हैं, उसी प्रकार नियमित रूप से सोने में भी निवेश करना चाहिए। जीवन में कौन साथ दे या न दे, लेकिन सोना भविष्य में हमेशा आपका साथ देता है।
श्री बरडिय़ा ने बताया कि यह सोच केवल निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और दूरदर्शिता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पुराने समय से ही भारतीय परिवार कठिन परिस्थितियों में सोने को सबसे भरोसेमंद संपत्ति मानते आए हैं। प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखना है। भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्वैलरी उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है।


